भवंस मेहता ट्रस्ट अचानक राजनीतिकों के निशाने पर आ गया है। भवंस मेहता महाविद्यालय को भवंस नेशनल विश्वविद्यालय का दर्जा केंद्र सरकार से मिल चुका है। 600 करोड़ रुपये की लागत से विश्वविद्यालय बनेगा। इसकी प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिकों ने ट्रस्ट को निशाने पर ले लिया। जमीनी विवाद में ट्रस्ट को उलझाने की कोशिश की जा रही है। यह तब हो रहा है, जब इस मामले में प्रशासन ने अपने कदम खींच रखे हैं।
भवंस मेहता ट्रस्ट का भरवारी में अस्पताल, महाविद्यालय और विद्याश्रम खुला है। विद्याश्रम में सैनिकों के बच्चे पढ़ते हैं। यहां मेघालय व सिक्किम के छात्र छात्रावास में रहकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। कई देशों में इस ट्रस्ट के स्कूल संचालित हैं। ट्रस्ट के प्रबंधक डॉ. रामनरेश त्रिपाठी ने कमान संभालते ही इसे विस्तार देना शुरू कर दिया है। डॉ. रामनरेश त्रिपाठी ने भवंस मेहता महाविद्यालय को साल भर पहले भवंस नेशनल विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाया। विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही जिले के लोग खुशी से उछल पडे़ थे। विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रस्ताव हुआ है। प्रस्ताव स्वीकृत है। कालेज प्रशासन को बजट का इंतजार है।
कालेज प्रशासन का कहना है कि जल्द ही बजट आने वाला है। यह सब प्रक्रिया चल ही रही थी कि परसरा ग्राम प्रधान ने भवंस मेहता ट्रस्ट के प्रबंधक के खिलाफ कोखराज थाने में लोक संपत्ति क्षति निवारण की रिपोर्ट दर्ज करा दी। इस मामले में प्रबंधक डॉ. रामनरेश त्रिपाठी का कहना है कि सोची-समझी साजिश के तहत जमीनी विवाद में ट्रस्ट को उलझाने की कोशिश की जा रही है। ट्रस्ट के मामले का पटाक्षेप हो चुका है। इसके बाद भी प्रधान ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। प्रबंधक का कहना है कि हाल ही में गलत तरीके से कालेज में बच्चों का एडमिशन कराने का प्रयास किया गया था। एडमिशन न होने पर शिक्षकों को धमकी दी गई थी। दबाव बनाने के लिए तथ्यों को छिपाकर रिपोर्ट लिखवाई गई है।