दरिंदगी के बाद भतीजी की हत्या कर भैरव ने मचा दी थी सनसनी
-दहला था दोआबा-
हाईकोर्ट से सजा होते ही हो गया फरार, 12 हजार का है इनामी, सुप्रीम कोर्ट सख्त
पइंसा इलाके में वर्ष 2006 में हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। पइंसा इलाके के कइमा गांव का भैरव पासी क्रूरता का दूसरा नाम है। करीब 13 साल पहले उसने अपनी मासूम भतीजी की दरिंदगी के बाद हत्या कर दी थी। हाईकोर्ट से फांसी की सजा होते ही फरार हो गया। 12 हजार केे इनामी भैरव को 2008 के बाद से पुलिस ही नहीं एसटीएफ भी तलाश रही है, लेकिन उसका सुराग नहीं लग सका है।
बताया जाता है कि उस वक्त 25 साल की उम्र का भैरव शराब का आदी था। नशे में ही वर्ष 2006 में वह एक रोज अपनी करीब दो साल की भतीजी को गांव के बाहर उठा ले गया। वहां खेत में दरिंदगी करने के बाद मासूम को तड़पता हुआ छोड़कर घर चला आया। हैवानियत की पराकाष्ठा यह है कि घंटे भर बाद फिर से खेत पहुंचकर उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। उसके जिस्म पर कई जगह दांत काटा। इससे मासूम की मौत हो गई। मामले में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। विवेचना के दौरान भैरव का नाम प्रकाश में आया। जिस पर पुलिस ने उसे जेल भेज दिया। निचली अदालत ने हत्याकांड में भैरव को फांसी की सजा सुनाई। बाद में सजा कम कराने के लिए वह हाईकोर्ट पहुंच गया। उच्च न्यायालय ने भैरव को जमानत दे दी, लेकिन सुनवाई के दौरान वर्ष 2008 में निचली अदालत की सजा बरकरार रखते हुए पुलिस को गिरफ्तारी करने का निर्देश दे दिया। कोर्ट का फैसला आने से पहले ही भैरव फरार हो गया। उसपर 12 हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ। गिरफ्तारी के लिए पुलिस व एसटीएफ ने कई राज्यों में छापामारी की, लेकिन भैरव को कोई खोज नहीं पाई। अब समीक्षा बैठकों में उसपर इनाम की राशि भर बढ़ाई जाती है।
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सुप्रीम कोर्ट सरकार को लगा चुकी है फटकार
मंझनपुर। भैरव का मामला बाद में सरकारी अधिवक्ता के जरिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। नतीजा रहा कि सरकार को दो पुलिस कप्तान बदलने पड़े। फिर भी भैरव को नहीं पकड़ा जा सका। इस मामलें में दो साल पहले प्रदेश सरकार की जमकर किरकिरी हो चुकी है।
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कौशाम्बी में फांसी की पहली सजा
मंझनपुर। भैरव से पहले कौशाम्बी में किसी को भी फांसी की सजा नहीं हुई थी। यह पहला प्रकरण था जब सेशन कोर्ट ने भैरव को फांसी की सजा सुनाई थी। अधिवक्ताओं और जानकारों की मानें तो पुलिस ने इतने पर्याप्त साक्ष्य पेश किए थे कि भैरव को फंदे पर लटकाए जाने से कोई रोक नहीं सकता था। शायद इसीलिए भैरव फरार हो गया।