मंझनपुर। कौशाम्बी में बैंक विकास कार्यों में रोड़ा बने हैं। ज्यादातर सरकारी योजनाएं बैंकों में ही दम तोड़ रही हैं। लाभार्थियों के चयन और स्वीकृत के बाद भी फाइलों का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। कर्ज अवमुक्त नहीं होने से परियोजनाएं फंसी पड़ी हैं। इससे आमजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बैंकों की लापरवाही पर जिलाधिकारी की निगाह तिरछी हुई हैं। डीएम ने प्रबंधकों को जल्द ही तकड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
दोआबा के विकास की पूरी जिम्मेदारी बैंकों के हाथ में है। सभी विभागों की 90 फीसदी योजनाओं का संचालन बैंकों के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था है। बैंकों की मनमानी के कारण ज्यादातर सरकारी योजनाएं फाइलों में सिमट कर रह गई हैं। मुख्य विकास अधिकारी बीएन मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग, कामधेनु, मिनी कामधेनु डेयरी आदि योजनाओं की फाइलें बैंकों की विभिन्न शाखाओं में लंबित हैं। अफसरों की स्वीकृत के बाद लाभर्थियों को कर्ज अवमुक्त करने में आनाकानी की जा रही है। इससे सरकारी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। बैंकों की लापरवाही पर जिलाधिकारी खफा हैं।
डीएम ने लापरवाह बैंकों से सरकारी रकम हटवाने के अलावा संबंधित प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई स्वीकृत करके वित्त विभाग को पत्र भेजने का निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिया है। सीडीओ ने बताया कि इलाहाबाद, स्टेट बैंक और बड़ौदा पूर्वी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंकों से जिलास्तरीय अफसरों को सरकारी रकम हटाने के लिए फरमान जारी किया है। जल्द ही बैंकों को कालीसूची में डालने की कार्रवाई की जाएगी। डीएम राजमणि यादव का कहना है कि बैंकों को दिलचस्पी से काम करना होगा। विकास कार्यों में मनमानी करने वाले प्रबंधकों को बख्सा नहीं जाएगा। संबंधित मैनेजरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।