पहले खुद का पेट पाल लो तब जानवर पालने की सोचना। यह किसी पटकथा का संवाद नहीं बल्कि बीओबी विजिया के प्रबंधक का जवाब है। डीएम से शिकायत करने के बाद आवेदक बैंक पहुंचे तो मैनेजर ने यह कहते हुए उनका ऋण ही मंजूर करने से इनकार कर दिया। इससे आवेदक हैरान परेशान हैं।
विकास खंड कौशाम्बी के गढ़वा निवासी नथन, बांकेलाल, हिसामबाद निवासी केश कुमार, रेखा देवी आदि ने भैंस, सुअर और बकरी पालन करने के लिए सीपीपी अंतर्गत बीओबी विजिया में आवेदन कर रखा है। आवेदन के बाद से बैंक मैनेजर उन्हें लगातार दौड़ा रहा है। मामले की शिकायत आवेदकों ने पिछले दिनों डीएम अखंड प्रताप सिंह से की थी। बैंकर्स समिति की बैठक में डीएम ने बैंक मैनेजर विजिया को फटकार लगाया। चेतावनी दिया कि हर हाल में आवेदकों का ऋण मंजूर कर पशुपालन के कार्य में सहयोग करें।
डीएम से शिकायत करने के बाद आवेदक बैंक पहुंचे तो मैनेजर ने उन्हें आड़े हाथों लिया। कहा कि डीएम के कह देने से बैंक ऋण नहीं दे देगा। ऋण उसी को दिया जाता है जिसके पास अदायगी के लिए कुछ होता है। आवेदकों की माने तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि पहले अपना पेट पाल लो तब मवेशी पालना। बैंक मैनेजर के व्यवहार से परेशान आवेदक मायूस होकर घर लौट गए। बहरहाल कुछ भी हो जब बैंकों में पशुपालन करने की मंशा पाल रखे लोगों से ऐसा व्यवहार होगा तो पशुपालन को कितना बढ़ावा मिल सकेगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
बैंक में रोज तमाम उपभोक्ता आते रहते हैं। किससे क्या बात हुई है यह याद थोड़े ही रहता है। जिसका आवेदन बैंक के नजरिए से सही होगा उसे ऋण दिया जाएगा। वसूली तो बैंक को करानी पड़ती है।
अनिल कुमार, शाखा प्रबंधक बीओबी