चायल तहसील के 59 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक
कमिश्नर के आदेश पर डीएम ने लगाई पाबंदी, वकीलों ने आदेश वापस लेने की डीएम से की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल। चायल तहसील के 59 गांवों को प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा अपने आधीन लिए जाने के बाद वहां जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी गई है। कमिश्नर प्रयागराज के आदेश पर डीएम कौशाम्बी ने इसे लागू करा दिया। इससे चायल बार एसोसिएशन और प्रभावित गांव के किसानों में नाराजगी है। चायल तहसील के वकीलों ने डीएम से आदेश वापस लेने की मांग की है।
चायल तहसील क्षेत्र के 59 गांव प्रयागराज विकास प्राधिकरण में शामिल कर दिए गए हैं। प्रयागराज से सटे गांवों में बड़े स्तर पर जमीन की खरीद-बिक्री का कारोबार चलता है। जमीनें विकास प्राधिकरण से ले आउट स्वीकृत कराए बिना ही अनाधिकृत रूप से प्लॉटिंग कर बेच दी जाती हैं। इसके चलते अवैध निर्माण और कब्जे का खेल चल रहा है। जमीन के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने के साथ ही सुनियोजित विकास करने के उद्देश्य से मंडलायुक्त ने 28 जुलाई को चायल के 59 गांवों के विकास प्राधिकरण से ले-आउट की स्वीकृति प्राप्त किए बिना रजिस्ट्री नहीं करने का आदेश दिया था। इसके बाद डीएम मनीष कुमार वर्मा ने भी चायल उपनिबंधक को संबंधित गांवों की जमीन का बैनामा करने पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया। जो अभी भी लागू है। जबकि प्रयागराज के जिलाधिकारी ने 10 अगस्त को कमिश्नर के निर्देश से संबंधित अनुपालन का अपना आदेश वापस ले लिया। इसके बाद से वहां की तहसीलों में बगैर विकास प्राधिकरण से ले- आउट स्वीकृत कराए ही बैनामे होने लगे हैं। इसी बात को लेकर चायल तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं समेत प्रभावित गांवों के काश्तकारों में नाराजगी है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मान सिंह का कहना है कि 59 गांवों की भूमि का बैनामा रोकने से राजस्व को काफी क्षति हो रही है। साथ ही प्रभावित गांवों के किसान भी परेशान हो रहे हैं। इसे लेकर अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को डीएम से मिलकर चायल स्थित प्रयागराज के सीमावर्ती 59 गांवों की जमीन के बैनामे पर लगाई गई पाबंदी को वापस लेने की मांग की। जिलाधिकारी ने जल्द ही मामले में पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया है।