मंझनपुर। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की आंकिक शाखा में तैनात लिपिक (एकाउंटेंट) को एसपी का फर्जी दस्तखत बनाना महंगा पड़ गया। ट्रेजरी चालान में दस्तखत करने पर पकड़ी गई उसकी इस कारगुजारी पर पुलिस अधीक्षक ने उसे निलंबित कर दिया और मामले की जांच सीओ सिटी को सौंप दी है। पुलिस अधीक्षक ने बताया आंकिक शाखा के सभी कर्मचारियों की गतिविधियां खंगाली जा रही हैं। सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस लाइंस से खजाने को बैंक में जमा कराने के लिए पुलिस विभाग की आंकिक शाखा में तैनात एकाउंटेंट (लिपिक) कमर अब्बास ने खुद ही ट्रेजरी चालान में एसपी का हस्ताक्षर करके 75 हजार 951 रुपये एसबीआई की भरवारी शाखा में जमा करा दिया था। यह रकम विशेष ड्यूटी पर लगाए गए महकमे के कर्मियों के भत्ते की होती है। मामले का खुलासा बुधवार की सुबह तब हुआ जब बिना अफसरों की जानकारी के पुलिस फोर्स को सेट से पुलिस लाइंस विशेष ड्यूटी के लिए बुलाया जाने लगा। उस समय पुलिस लाइंस में सीओ सिटी आलोक मिश्र मौजूद थे। वही सीओ लाइंस का काम भी देखते हैं।
बगैर उनके संज्ञान में फोर्स को बुलाए जाने पर उन्हें शक हुआ। उन्होंने आरआई लाइंस से पूछताछ की। आरआई (प्रतिसार निरीक्षक) भी टाल-मटोल उत्तर देने लगा। उन्होंने मामले की छानबीन की तो सामने आया कि ट्रेजरी चालान में एसपी के फर्जी दस्तखत हैं। उन्होंने तत्काल मामले की जानकारी एसपी और एएसपी को दी। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. के एजिलरसन ने एकाउंटेंट (लिपिक) कमर अब्बास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इतना ही नहीं पुलिस अधीक्षक ने सीओ सिटी को एकाउंटेंट की और कारगुजारियों के साथ आंकिक शाखा के अन्य सभी कर्मचारियों की गतिविधियों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। दोषी मिलने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।