लगातार ग्यारह वर्षों से सामाजिक सेवा करके सरकारी कर्मचारी की भांति कदम ताल मिलाकर काम रही आशा कार्यकत्रियों को अब अखरने लगा है। आरोप है कि दशकों से अपने कार्य को ईमानदारी से कर रही आशाओं को अब तक सरकारी दर्जा नहीं दिया गया है, न ही उन्हें वेतन दिया जा रहा है। मिलने वाला मानदेय भी इतना कम है कि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। बैठक कर मुख्यमंत्री का घेराव करने की घोषणा भी की गई।
सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आशा कार्यकत्रियों की आयोजित बैठक में अगुवाई कर रही प्रभा सिंह ने कहा कि उन लोगों को मिल रहा मानदेय इक्कीसवीं सदी में एक बच्चे की फीस के लिए भी पर्याप्त नहीं है। बैठक में शामिल हुई सुधा सिंह, अनीता सिह, प्रेमलता, रामकुमारी, नगीना, नजमा, रीना, गुंजा, कमला व ऊषा ने कहा कि वेतन निर्धारित, दुर्घटना बीमा व अस्पतालों में विश्राम कक्ष उपलब्ध कराया जाए। साथ ही चेतावनी दिया कि जिले में आ रहे मुख्यमंत्री का वह घेराव कर अपनी आवाज बुलंद करेंगी।