शिक्षा के बाजारीकरण को रोकने के लिए घर की दहलीज से हो शुरुआत
अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल के तहत महामाया डिग्री कॉलेज के बच्चों ने रखी राय
मंझनपुर। बदलते परिवेश में शिक्षा के बाजारीकरण को रोकने के लिए घर की दहलीज से जन आंदोलन करने की आवश्यकता है। आज अभिभावक शिक्षा का गुणात्मक विश्लेषण किए बगैर ही अपने बच्चों को चमक-धमक वाले स्कूलों में दाखिला करा रहे हैं। यह परिपाटी शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के बजाय उसे गिराने का काम कर रही है।
सोमवार को महामाया राजकीय डिग्री कॉलेज ओसा में शिक्षा के बाजारीकरण का असल जिम्मेदार कौन? विषय पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में बच्चों ने बेबाकी से अपनी राय रखी। अमर उजाला समाचार पत्र की मुहिम अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल के तहत आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी राय न सिर्फ जाहिर की, बल्कि उसे अमल में लाने के लिए अपील भी किया। बीएससी सेंकड ईयर के छात्र राजकुमार पाल ने कहा कि आज सरकारी स्कूलों की सीट खाली रह जाती हैं। जबकि यहां कुशल मार्ग दर्शक शिक्षकों के अलावा पढ़ने के आधुनिक संसाधन भी है। इसके बाद भी लोग निजी स्कूलों की तरफ भाग रहे हैं। छात्रा मानसी जायसवाल ने तर्क दिया कि अगर सभी लोग यह सोच लें कि बिना किसी आरक्षण के वह प्रतियोगिता के जरिए मुकाम हासिल करें तो स्कूलों के अंदर से यह भेदभाव हट जाएगा। इसके अलावा दीपिका तिवारी, ज्योति देवी, अनुराग मिश्र, नेहा शुक्ला, रीतिका आदि ने वाद-विवाद प्रतियोगिता में अपनी राय पक्ष और विपक्ष में रखी। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि अगर यह प्रयास सफल हुआ तो वास्तव में बड़ा बदलाव सामने होगा। उन्होंने कहा कि आज अभिभावक स्कूल में शिक्षा का मूल्यांकन कम और स्टेट्स सिम्बल ज्यादा समझ कर अपने बच्चों का दाखिला कराता है। यह गंभीर विषय है। इस मौके पर प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. भावना केसरवानी, डॉ. रमेश चंद्र, डॉ. स्वाती चौरसिया के अलावा सुशील श्रीवास्तव, अजय बाबू, प्रेमचंद्र, कल्पना लोघी, अलका वर्मा, अरविंद कुमार, रोशनी देवी, प्रवीण कुमार, शिवम, अर्जुन कुमार, अनामिका, प्रेरणा, शिव कुमारी, पूनम कुमारी आदि लोग मौजूद रहे।