मंझनपुर/अटसराय। बेटी ही बचाएगी...इस सूत्रवाक्य को जिसने भी आत्मसात किया है...आज उसका दामन उनकी लाडली बेटी ने खुशियों से भर दिया है। इसकी ही एक बानगी टांडा गांव की रहने वाली अनुपमा देवी के रूप में देखने को मिल रही है। पढ़ाई के दिनों में ही इस बिटिया ने मां-बाप और परिवार के सदस्यों को कई बार मुस्कुराने का मौका दिया है। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में जिले की टॉपर बन चुकीं अनुपमा बीएससी के बाद अब सिविल सेवा की तैयारी में जुटी हैं। मां-बाप को यकीन है कि उनकी बिटिया अफसर बनकर यह सपना भी जरूर पूरा करेगी।
कौशाम्बी की सिराथू तहसील का एक छोटा सा गांव का टांडा। यही के रहने वाले हैं शिक्षक राम प्रसाद। शिक्षक के घर ही 29 जुलाई 1995 को अनुपमा का जन्म हुआ था। तीन बहन और एक भाई में अनुपमा सबसे बड़ी है। बचपन से ही पिता के साथ जिद करके स्कूल जाने वाली अनुपमा ने हाईस्कूल की परीक्षा वर्ष 2009 में 82.8 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण करके जिले में टाप किया था। इसी तरह से 84 फीसदी नंबरों के साथ उसने वर्ष 2011 में 12 वीं की परीक्षा में भी खुद को जिले में अव्वल बनाया। जिले की टॉपर बनने पर उसे जहां केपी स्कूल इलाहाबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन माध्यमिक शिक्षामंत्री रंगनाथ मिश्र ने सम्मानित किया था। बल्कि उसे डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय मेरिट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।
वहीं उसे आगे की पढ़ाई के लिए तीन साल तक माध्यमिक शिक्षा परिषद की राष्ट्रीय स्कालरशिप भी प्रदान की। पिछले शिक्षासत्र में प्रथम श्रेणी में बीएससी उत्तीर्ण करने के बाद अब वह सिविल सेवा की तैयारी में जुटी है। पिता को देखकर पढ़ाई की प्रेरणा हासिल करने वाली अनुपमा चाहती है कि वह आईएएस अफसर बनकर देश और समाज की सेवा करे। उसकी लगन, मेहनत देखकर मां-बाप ही नहीं परिवार के सभी सदस्यों को पक्का यकीन है कि उसका यह सपना भी पूरा होगा और यह बिटिया समाज ने उनका नाम रौशन करेगी।