विकास खंड कौशांबी के आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकत्रियां हौसला पोषण योजना को चपत लगा रही हैं। केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए दो माह से भोजन नहीं बन रहा है। योजना शुरू होने के दो दिन बाद से ठप चले आ रहे चूल्हे की जानकारी सीडीपीओ को है, लेकिन उनके द्वारा कोई संजीदगी नहीं दिखाई जा रही है।
शासन ने गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य सुधारे जाने के लिए हौसला पोषण योजना की शुरुआत तीन अगस्त को किया। योजना शुरू होने के बाद अफसरों ने दबाव बनाकर एक-दो दिन तक स्कूलों में मध्याह्न भोजन के साथ योजना का भोजन बनवाया। इसके बाद हौसला पोषण योजना के चूल्हे ठंडे हो गए। सूत्रों की माने तो योजना का पैसा भी ग्राम सभाओं के खाते में पहुंच चुका है। इसके बावजूद गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
हौसला पोषण योजना की हकीकत जानने के लिए इलाकाई संवाददाता ने बृहस्पतिवार को मुस्तफाबाद, इटैला, बेरौचा, गुरौली, गोइठा, कायमपुर, सोंधिया, भैरवां सहित दर्जनभर आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पता चला कि योजना शुरू होने के एक-दो दिन बाद से हौसला पोषण के चूल्हे ठंडे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हौसला पोषण योजना से गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य कितना सुधर रहा है। मामले में सीडीपीओ कौशाम्बी दुर्गेश जायसवाल से पूछा गया तो उनका कहना था कि मामले की जानकारी है। प्रधान पैसा नहीं निकाल रहे हैं। इसके चलते हौसला पोषण योजना का भोजन नहीं बन पा रहा है। मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।