लोहिया आवास आवंटन में अंधावा की तरह और भी समग्र गांव हैं, जहां पर पात्रता दरकिनार कर आवासों का आवंटन किया गया है। इसके एवज में संबंधित ग्राम प्रधानों, सेक्रेटरियों और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने जमकर वसूली भी की है। बड़हरी सहित कई ग्राम सभाओं का अफसरों ने जांच के लिए चिन्हांकन कर लिया है। अंधावा की कार्रवाई होने के बाद इन गांवों में अफसरों की टीम का पहुंचना तय हो गया है।
वित्तीय वर्ष 12-13, 13-14 और 14-15 में ग्राम सभाओं को थोक के भाव लोहिया आवासों का आवंटन तत्कालीन अफसरों द्वारा किया गया था। संबंधित ग्राम प्रधानों ने सत्ता के नेताओं से सांठगांठ कर अपनी-अपनी ग्रामसभा में सैकड़ों आवास ले जाने में कामयाबी हासिल की थी। इसके बाद ग्राम सभाओं में अपात्रों को आवास का आवंटन कर जमकर वसूली भी की गई। इसके एवज में तत्कालीन अफसरों ने भी खूब मलाई काटी। पिछले दिनों ग्रामीणों की शिकायत पर अंधावा गांव में 25 अफसरों की टीम ने जांच किया तो चौंकाने वाले रहस्य सामने आए। सामान्य जाति के अपात्र एससी बने मिले तो चार-चार भाइयों को एक ही घर में आवास आवंटित किया गया। इसके अलावा लाभार्थी को एक किस्त ग्रामीण बैंक तो दूसरी किस्त किसी और बैंक में भेजी गई।
सबसे बड़ी खामी यह पकड़ में आई कि कई लाभार्थियों के खाते में रकम पहुंची और उसका भुगतान भी हो गया पर न आवास का पता है और न ही लाभार्थी का। आवास आवंटन में चौंकाने वाले खुलासे होने के बाद अब अन्य गांवों में गड़बड़ी मिलने की संभावना बढ़ गई है। इसे देखते हुए जिलास्तरीय अधिकारियों ने उन गांवों की सूची तैयार कराना शुरू कर दिया है जहां पर थोक के भाव आवासों का आवंटन पूर्व में किया गया है। इसमें बड़हरी सहित जिले के लगभग एक दर्जन गांव शामिल हैं। अंधावा की जांच रिपोर्ट फाइनल होने के बाद अफसर इन ग्राम सभाओं की जांच के लिए जल्द ही टीम गठित कर आवास आवंटन की हकीकत खंगालने पहुंचेंगे।
चायल और सिराथू के भी हैं कई गांव
लोहिया आवास थोक के भाव में पाने वाली ग्राम सभाएं सिराथू और चायल में भी हैं। दोनों ब्लॉकों के असरदारों ने अपने-अपने करीबी ग्राम प्रधानों को तत्कालीन सीडीओ और डीएम पर दबाव बनाकर आवास दिलाने का काम किया था। किस ग्राम सभा को कितने आवास का आवंटन किया गया है इसका सारा रिकार्ड विकास भवन में मौजूद है। बस देरी है तो अफसरों के संबंधित गांव में पहुंचकर लोहिया आवास की हकीकत खंगालने की।
नमूने पर नहीं बने एक भी आवास
थोक के भाव लोहिया आवास पाने वाले समग्र गांवों में एक भी आवास शासन के नमूने पर नहीं बनवाए गए। लाभार्थियों ने आवास का निर्माण इंदिरा और महामाया की तर्ज पर कराते हुए काम पूरा किया है। इससे शासन का करोड़ों रुपया खर्च होने के बाद भी गांवों में यह पहचान करना मुश्किल हो रहा है कि लाभार्थी लोहिया आवास का है या फिर किसी और का।
अंधावा की जांच पूरी हो गई है। मामले में कार्रवाई के लिए तैयारी की जा रही है। इस मामले का पटाक्षेप होने के बाद थोक के भाव आवास लेने वाले अन्य गांवों की ओर रुख किया जाएगा। जहां भी गड़बड़ी है आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
डॉ. दिनेश कुमार सिंह, सीडीओ