Ambulance could not reach even in need in Banikhas village
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बनीखास गांव में जरूरत पर भी नहीं पहुंच पाती एंबुलेंस
पश्चिमशरीरा। सरसवां ब्लॉक का बनीखास गांव जिले का ऐसा गांव है, जहां न तो दूल्हे की कार जाने का रास्ता है और न ही जरूरत पर एंबुलेंस जा सकती है। अन्य जरूरी सुविधाओं का भी टोटा ही है। जब माननीय का पैतृक गांव विकास से कोसों दूर होगा तो जनपद के अन्य साधारण गांवों की हालत क्या होगी। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सोमवार को अमर उजाला की टीम बनीखास पहुंची। ये मंझनपुर विधायक लालबहादुर का पैतृक गांव है। यहां पहुंचने से पहले लगा था कि सारी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होंगी। पहली नजर में काफी कुछ लकदक दिखी भी। क्योंकि हम विधायक के मोहल्ले में थे। आगे बढ़े तो दिखा कि गलियां दशकों बाद भी सड़क का रूप नहीं ले सकी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कभी कोई बीमार हो जाता है तो उसे चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। दूल्हा भी मुख्य सड़क पर उतरने के बाद पैदल ही दुल्हन के घर पहुंचता है। इस बस्ती में विकास के नाम पर कुछ कराया ही नहीं गया है। तमाम लोगों का शौचालय महीनों बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। विधायक का मोहल्ला छोड़ दें तो पूरे गांव में न तो सफाई होती है, न कहीं नाली है और ना ही पानी का पर्याप्त इंतजाम है। तीन से चार फीट का जो खड़ंजा है, वह भी जगह-जगह पर उखड़ा हुआ है। बिजली व्यवस्था धड़ाम है। शौचालय नहीं बने होने के कारण अधिकतर लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड, विधवा, वृद्धा, विकलांग पेंशन आदि योजनाओं के लिए लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का लाल विधायक बनने के बाद उन्हें विकास की उम्मीद जागी थी, लेकिन अब उम्मीदों पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है। वहीं विधायक मंझनपुर लाल बहादुर का कहना है कि सही बात है कि गांव में मार्ग का संकट है। इस समस्या के साथ ही अन्य समस्याओं को भी जल्द ही दूर करा दिया जाएगा। किसी बस्ती के साथ पक्षपात की शिकायत नहीं मिली है। ऐसा है तो अफसरों से प्रधान-पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा जाएगा।