अक्षय तृतीया के मौके पर सोमवार को शीतलाधाम कड़ा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। दूर दराज से आए भक्तों ने भोर से ही गंगा स्नान कर मां के जयकारे लगाते हुए शीतला दरबार में माथा टेकना शुरू किया। इस दौरान भक्तों ने अपने-अपने बच्चों का धाम में मुंडन संस्कार भी कराया। गंगा स्नान और मां शीतला के दर्शन का सिलसिला सोमवार की शाम तक चलता रहा।
हिंदू संस्कार में अक्षय तृतीया का खास महत्व है। माना जाता है कि इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य अधूरा नहीं रहता। इसके चलते लोग अक्षय तृतीया के दिन भवनों की नींव, जेवरात की खरीद करते हैं। शीतलाधाम कड़ा में इस दिन मुंडन संस्कार का भी विशेष महत्व है। सोमवार को पर्व के महत्व को देखते हुए शीतलाधाम कड़ा में जिले के अलावा प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, लखनऊ, रायबरेली, बनारस, मिर्जापुर समेत कई जनपदों के भक्तों की भीड़ उमड़ी।
धाम में पहुंचे भक्तों ने भोर से ही गंगा स्नान कर मां के दरबार में माथा टेकना शुरू कर दिया। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी भी भक्तों को मां के दरबार तक पहुंचने में विचलित नहीं कर सकी। जयकारे लगाते हुए भक्त मां की दरबार में दिनभर माथा टेकते रहे। मां के पूजन-अर्चन का सिलसिला सोमवार की भोर से लेकर देर शाम तक चलता रहा। दिन भर में हजारों लोगों ने मां शीतला की दरबार में माथा टेकते हुए अक्षय तृतीया के मौके पर पुण्य अर्जित किया। यहां के अलावा जिले के पल्हाना, संदीपन, फतेहपुर आदि गंगा घाटों पर भक्तों ने पुण्य की अक्षय डुबकी लगाई।
अक्षय तृतीया के मौके पर शीतलाधाम कड़ा में बच्चों का मुंडन कराने वाले भक्तों की भारी भीड़ रही। मां के दरबार और चबूतरे के नीचे भक्तों ने भारी संख्या में अपने बच्चों का मुंडन कराया। इस दौरान स्थानीय पंडों और मुंडन करने वाले नाइयों की चांदी रही।
अक्षय तृतीया के मौके पर सोने-चांदी के जेवरात खरीदे जाने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन सोने-चांदी की खरीद से घर में समृद्धि आती है और लक्ष्मी का निवास होता है। इस मान्यता के मुताबिक जिले की सर्राफा की दुकानों में सुबह से ही खरीददारों की भारी भीड़ लगी रही। सर्राफा बाजार के सूत्रों की माने अक्षय तृतीया के मौके पर जिले भर में दो करोड़ के जेवरात की खरीद फरोख्त की है।
अक्षय तृतीया पर मकान बनवाने के लिए भूमि पूजन और नींव डाले जाने की भी परंपरा है। सोमवार को शुभ तिथि की शुभ घड़ी में लोगों ने पुरोहित को बुलाकर भूमि का पूजन कराया। कुछ लोगों ने राजगीर को बुलवाकर इस मौके पर नए घर का निर्माण भी शुरू कराया।