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कौशाम्बी : आखिर...सपा-भाजपा के बीच ही बंटे नजर आए वोटर, साख बचाने के लिए जूझती दिखी बसपा

Tue, 21 May 2024 04:38 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

19 लाख मतदाताओं वाले कौशाम्बी लोकसभा क्षेत्र में 7 लाख से अधिक दलित वोटर हैं। इसमें भी पासी मतों की संख्या चार लाख से ज्यादा है। इसके अलावा यादव और मुस्लिम मतों की संख्या भी दो-दो लाख के करीब है। भाजपा प्रत्याशी निवर्तमान सांसद विनोद सोनकर के मुकाबले समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर महज 25 वर्षीय युवा पुष्पेंद्र सरोज पर दांव लगाया।

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पुष्पेंद्र सरोज।
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विस्तार
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कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र के चुनाव में मतदान के दिन अंतत: वोटर सीधे तौर पर भाजपा और सपा के बीच बंट गए। भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर और सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज के बीच जमकर ध्रुवीकरण हुआ। बसपा पूरे दिन साख बचाने को मतदान केंद्रों पर जूझती दिखाई पड़ी।

19 लाख मतदाताओं वाले कौशाम्बी लोकसभा क्षेत्र में 7 लाख से अधिक दलित वोटर हैं। इसमें भी पासी मतों की संख्या चार लाख से ज्यादा है। इसके अलावा यादव और मुस्लिम मतों की संख्या भी दो-दो लाख के करीब है। भाजपा प्रत्याशी निवर्तमान सांसद विनोद सोनकर के मुकाबले समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर महज 25 वर्षीय युवा पुष्पेंद्र सरोज पर दांव लगाया।

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जातिगत समीकरणों के चलते समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर शुरू से ही सपा और भाजपा के बीच संघर्ष नजर आने लगा था। बसपा चुनाव को त्रिकोणात्मक बनाने में जुटी थी। जैसे-जैसे मतदान की तिथि नजदीक आई। मतदाता सपा और भाजपा के बीच बंटने शुरू हो गए।

परिवार के साथ वोट डालने के बाद स्याही का निशान दिखाते सांसद विनोद सोनकर। - फोटो : अमर उजाला।

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, अपना दल एस की मुखिया अनुप्रिया पटेल व निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने जनसभा कर मतदाताओं को साधने का प्रयास किया। 16 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा ने भी भाजपाइयों में जोश भरा। भाजपा समर्थक मतदाता एकजुट भी हुए, लेकिन इसी दिन सपा मुखिया अखिलेश यादव द्वारा सपा प्रत्याशी के समर्थन में की गई चुनावी सभा ने जिले की राजनीति की हवा बदल दी। पूरे चुनाव में भाजपा पासी मतों में सेंधमारी की रणनीति बनाती रही, लेकिन मतदान के दिन सारी रणनीति बेअसर दिखी।

बिरादरी का युवा प्रत्याशी होने के कारण पासी मतदाता मतदान केंद्रों पर सपा के पक्ष में लामबंद दिखाई दिए। कोर वोटर होने के कारण मुस्लिम और यादव तो पहले ही दिन से सपा के पक्ष में खड़े नजर आए। चुनाव में जातिगत टिप्पणियों को लेकर वायरल वीडियो का भी असर देखने को मिला। मतदान के दौरान वायरल वीडियो, वाईएमपी गठजोड़ और अगड़ों में सेंधमारी की मुहिम कुछ अलग ही तरह का गुल खिलाते दिखी। इससे भी इतर एक और बात दिखी कि राजा भइया की प्रभाव वाली कुंडा और बाबागंज विधानसभा सीट पर मतदान के दिन उनके लोग सपा के पक्ष में काम करते दिखे। सियासी जानकार इसके अलग मायने बता रहे हैं।

मंझनपुर असकरनपुर मंगरोहनी मतदान केंद्र में लाइन में खड़ी महिला मतदाता। - फोटो : अमर उजाला।

नहीं नजर आए निर्दलीय प्रत्याशी

कौशाम्बी लोकसभा सीट से दस प्रत्याशी मैदान में थे। सपा, भाजपा और बसपा के अलावा पांच निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़े थे। मतदान केंद्रों पर सपा, भाजपा और बसपा प्रत्याशी व उनके समर्थ नजर आए। निर्दलीय प्रत्याशी कहीं नहीं दिखे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुछ निर्दलीय प्रत्याशी तो सपा और भाजपा के डमी थे। उनको मिले वाहनों का उपयोग चुनाव में संबंधित दलों के नेताओं ने अपने लिए किया । चुनाव में तो सपा और भाजपा के बीच ही आमने सामने की लड़ाई रही है। संवाद

नहीं दिखे गठबंधन नेता

इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी मतदान के दिन नहीं दिखे। सपा प्रत्याशी को समर्थन देने वाले इन दलों के नेता जयादा सक्रिय नहीं हुए। अपने मतदान केंद्रों पर ही मौजूद रहकर मतदान किया। सपा के बस्तों पर भी दोनों दलों के नेता मतदान के दिन नजर नहीं आए।

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सिराथू के मधवामई मतदान केंद्र में अपनी आईडी दिखाती लाइन में खड़ी महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

प्रभावहीन दिखे पीडीएम गठबंधन उम्मीदवार
 

मंझनपुर। चुनावी समर में उतरे पीडीएम गठबंधन प्रत्याशी नरेंद्र कुमार का भी खास प्रभाव नहीं दिखा। गठबंधन की संयोजक सिराथू से सपा विधायक पल्लवी पटेल की पार्टी अपना दल कसेरावादी व ओवैसी की एआईएमएआईएम के संयुक्त प्रत्याशी को शुरू में समाजवादी पार्टी के लिए नुकसानदेह माना जा रहा था। सियासियों का कहना था कि अपना दल के कोर वोटर प्रत्याशी का स्वाजातीय मत और ओवैसी की करारी में हुई जनसभा से पीडीएम उलटफेर कर सकता है, लेकिन मतदान के दिन ऐसा कुछ भी नहीं दिखा। जानकारों की मानें तो पीडीएम उम्मीदवार को चुनाव में जमानत बचाने के लाले पड़ सकते हैं।

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