मंझनपुर। जिले की दो ग्राम पंचायतों में प्रशासक ने दिल खोलकर सरकारी खजाना उड़ाया। महज चार महीने के भीतर सैयद सरावां गांव में 34 लाख व अषाढ़ा में 25 लाख रुपये की लागत से कथित तौर पर विकास कार्य करा दिए गए। इसे लेकर शासन ने हैरानी जताई है। अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने सीडीओ को खर्च हुई धनराशि की पड़ताल कराने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को सीडीओ शशिकांत त्रिपाठी ने दोनों गांवों के लिए अलग-अलग अफसरों की दो सदस्यीय टीम गठित कर दी। उन्होंने टीमों को 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने से पहले 25 दिसंबर 2020 को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो गया था। ऐसे में सहायक विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायतों की कमान बतौर प्रशासक के रूप में सौंप दी गई थी। नए प्रधानों को शपथ दिलाए जाने से पहले तक ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए जाने की जिम्मेदारी प्रशासकों की थी। ग्राम पंचायतों के खाते में लाखों रुपये रह गए थे। इसके बाद सहायक विकास अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों में काम कराना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रशासकों ने पंचम वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की रकम खर्च करने में खूब मनमानी की। इसकी जानकारी मिलने के बाद अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने ब्योरा तलब किया। पता चला कि सैयद सरावां और अषाढ़ा गांव में क्रमश: 34 एवं 25 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव ने सीडीओ को दोनों ग्राम पंचायतों की सूची भेजकर ग्राम पंचायतों में कराए गए कामों की पड़ताल कराने के निर्देश दिए। सीडीओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि सैयद सरावां गांव में प्रशासकों द्वारा कराए गए विकास कार्यों की जांच के लिए डीडीओ और एक्सईएन पीडब्ल्यूडी तथा अषाढ़ा गांव के लिए सीवीओ और एक्सईएन आरईएस की टीम गठित कर दी गई है। दोनों टीमों को 15 दिन के भीतर अपनी-अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि नियमों और मानक के उल्लंघन मिलने पर जिम्मेदारों के खिफाफ कार्रवाई होना तय है। इसे लेकर संबंधित प्रशासकों और सचिवों में खलबली है।