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रोजाना खून से लाल हुई द्वाबा की सड़कें

Wed, 23 Dec 2015 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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कौशाम्बी के लिए गुजरता साल 2015 मार्ग हादसों का वर्ष रहा। ऐसा कहना कोई गलत नहीं होगा। जनवरी से दिसंबर तक ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जिस रोज मार्ग हादसे से दोआबा की सड़कें खून से लाल नहीं हुई। सालभर में 331 मार्ग दुर्घटनाएं हुई हैं। 177 लोगों की जान गई। 250 से ज्यादा लोग जख्मी होकर कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझे।
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कौशाम्बी में सड़क दुर्घटनाएं रोज का किस्सा हो चुकी हैं। वर्ष 2015 तो मुसाफिरों के लिए जोखिमभरा साबित हुआ। सड़कों पर फर्राटा भरने वाले वाहन चालक खुद के साथ अपने और अन्य परिवारों की खुशियां छीनते रहे। साल के पहले महीने में 11 जनवरी को सुबह की सैर करने निकले सिराथू के रवींद्र सोनकर की मौत से शुरू मार्ग हादसे में जान जाने का सिलसिला थमा नहीं। 22 जनवरी की शाम करारी की मीरापुर गांव की 6 वर्षीय बालिका की ट्रैक्टर की चपेट में आने से जान चली गई। जनवरी से दिसंबर महीने के बीच देखें तो इन 357 दिनों में 331 मार्ग दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 156 मार्ग हादसों में 177 लोगों की मौत हुई। वहीं 250 से अधिक लोग मौत के मुंह में जाने से बाल-बाल बचे।

22 मार्च और 8 अगस्त को हुआ बड़ा हादसा
इस दौरान साल का सबसे बड़ा हादसा 22 मार्च 2015 को पिपरी के सेवढा गांव के समीप हुआ। जहां कार की चपेट में आने से गांव की रूपा देवी पत्नी सुखराम और उसकी बेटी रिया, बेटे मनीष की मौत हो गई थी। ये सभी लोग वाहन के इंतजार में सड़क किनारे खड़े थे। इसी तरह आठ अगस्त को पुरामुफ्ती के महगांव गांव के समीप टेंपों और बोलेरो की हुई सीधी टक्कर में जौनपुर जिले के बरसठी गांव निवासी  नंदलाल, अमरावती, वसीरा देवी, रोशनलाल, अवध लाल और विनोद समेत 6 लोगों की मौत हुई थी। ये लोग शीतलाधाम (कड़ा) दर्शन के लिए आ रहे थे।
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हादसों ने खोली ट्रैफिक पुलिस की कलई  
मंझनपुर (ब्यूरो)। जिले में रोजाना हुए मार्ग हादसों ने यातायात पुलिस की कलई खोलकर रख दी। हाईवे के साथ जनपद के अन्य मुख्यमार्गों पर ही ज्यादातर दुर्घटनाएं हुई हैं। पर, सड़कों पर यातायात सुरक्षा का कहीं कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया। सबसे बड़ी बात है कि जनपद में दुर्घटना बाहुल्य 10 स्थान चिह्नित हैं। यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती रही। फिर भी यातायात पुलिस और अफसर इन मार्ग हादसों को कम करने के लिए जरा भी फिक्रमंद नहीं नजर आए।

कागजों में चलता है यातायात जागरूकता माह
मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रतिवर्ष नवंबर का महीना यातायात जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। अभियान के दौरान वाहन चालकों और आमजन को यातायात नियमों की जानकारी देकर उन्हें जागरूक बनाने की जिम्मेदारी यातायात महकमे की होती है। पर, यह अभियान भी जनपद में सिर्फ खानापूर्ति तक ही सिमटा रहता है। वाहनों की चेकिंग और वसूली तक पुलिस सिमटी रहती है। एक-दो गोष्ठियां, स्कूलों में कार्यक्रम करके जिम्मेदार अभियान की इतिश्री कर लेते हैं।

क्षतिग्रस्त सड़कें ले रहीं जान
कौशाम्बी में औसतन सालाना 300 से ज्यादा मार्ग हादसे होेते हैं। इस दौरान 150 से 200 लोग प्रतिवर्ष अपनी जान भी गंवा रहे हैं। लापरवाही से वाहन चलाने के अलावा इन हादसों के लिए जिले की क्षतिग्रस्त सड़कें भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। अभी नवंबर महीने में ही भरवारी के समीप क्षतिग्रस्त सड़क के कारण ही हुए हादसे में बाइक सवार दो युवकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।   
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बड़े मार्ग हादसों पर एक नजर
22 मार्च: पिपरी के सेउढा गांव के समीप कार की चपेट में आने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत।
03 अप्रैल: मंझनपुर और करारी में बाइकों की भिड़त में दो की मौत।
26 अप्रैल: करारी में ट्रक की चपेट में आने से बच्चे की मौत, गुस्साए लोगों ने काटा बवाल।
08 अगस्त: पुरामुफ्ती के महगांव गांव के समीप टेंपों-बोलेरों की भिड़ंत में जौनपुर के छह लोगों की मौत।
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