आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं का आधार नामांकन आसान बनाने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने वर्षों पहले परियोजना कार्यालयों को आधार नामांकन किट उपलब्ध कराई थी। अब इन किटों का अधिकांश परियोजना कार्यालयों में कोई पता नहीं है। ऐसे में इनके उपयोग, रखरखाव और वर्तमान स्थिति पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सरसवां विकास खंड स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में पांच वर्ष पहले उपलब्ध कराई गई इन किटों का उद्देश्य लाभार्थियों का आधार पंजीकरण और संशोधन स्थानीय स्तर पर कराना था, ताकि टेक होम राशन वितरण में आधार आधारित सत्यापन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से इन डिवाइसों का उपयोग होते नहीं देखा गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि किटें उपलब्ध कराई गई थीं तो वे अब कहां हैं, उनसे कितने लाभार्थियों का आधार बनाया गया और यदि वे खराब या गायब हैं तो उनकी जवाबदेही किसकी है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लाभार्थियों की आधार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए गांव-गांव विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे।