मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा, सफाई और तकनीकी सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कॉलेज प्राचार्य के निर्देश पर 193 स्वीकृत पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है इनमें से 53 पदों पर तैनाती पूरी हो चुकी है। मेडिकल प्रशासन का मानना है कि इससे अस्पताल की व्यवस्था और बेहतर होगी।
जानकारी के अनुसार सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीशियन, स्टेनोग्राफर, फिटर, लिफ्ट ऑपरेटर, बेड अटेंडेंट, ड्रेसर और इलेक्ट्रीशियन जैसे पद शामिल हैं। इसके अलावा कंप्यूटर-डेटा एंट्री ऑपरेटर, डिस्पेंसर अटेंडेंट, लैब अटेंडेंट, हेल्पर, स्टोरकीपर, फिजियोथेरेपी तकनीशियन और ऑर्थोपेडिक तकनीशियन की भी नियुक्तियां की गई हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि शेष पदों को जल्द ही भरा जाएगा, ताकि अस्पताल की सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। कॉलेज प्राचार्य ने बताया कि अस्पताल में बढ़ते मरीजों और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाना है। साथ ही तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती से मशीनों और उपकरणों का संचालन सहजता से होगा जिससे मरीजों को समय पर और बेहतर उपचार कराया जा सकेगा।
प्रशासन का दावा है कि इस कदम से अस्पताल की कार्यक्षमता और सेवाओं की गुणवत्ता में काफी सुधार होगा। आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जा रही यह नियुक्तियां न केवल रोजगार उपलब्ध कराएगी, बल्कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और आने वाले परिजनों को स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण भी प्रदान करेगी।
इन पदों पर होनी है नियुक्ति
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, सफाईकर्मी के पद भरे जा चुके हैं। चपरासी के 26 में से नौ और सैनिटरी वर्कर के 31 पद खाली हैं। लाइब्रेरी अटेंडेंट और डिसेक्सन हॉल अटेंडेंट के दो-दो पद, लैब अटेंडेंट के 17 पदों पर भर्ती होनी है। इसके अलावा दफ्तरी के दो, पेशेंट हेल्पर के 24, अन्य हेल्पर के 13, स्टेनोग्राफर के 12, कंप्यूटर-डेटा एंट्री ऑपरेटर के पांच, ड्राइवर के चार, डिप्टी लाइब्रेरियन का एक, लीगल एडवाइजर का एक, एमएस-डब्ल्यू में चार, इलेक्ट्रिशियन के चार में तीन, आर्टिस्ट एक, साइकोलॉजी सोशल वर्कर एक, फोटोग्राफर एक, स्पीच थैरेपिस्ट एक, टेक्नीशियन 30, डायटीशियन दो, एनेस्थेटिक टेक्नीशियन एक और ऑडियोमेट्री टेक्नीशियन के एक पद पर नियुक्ति होनी है।
बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए व्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही तकनीकी स्टाफ की तैनाती से मशीनों का संचालन सुचारू होगा और मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिलेगा। - डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य