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57 गांवों में सवा सौ सफाई कर्मी फिर भी गंदगी का अंबार

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गांव न जाकर ब्लॉक मुख्यालय में समय काट रहे सफाई कर्मी
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57 गांवों में सवा सौ सफाई कर्मी फिर भी गंदगी का अंबार
एडीओ पंचायत की अनदेखी से बेपटरी हुई सफाई व्यवस्था
बारा (ब्यूरो)। विकास खंड कौशांबी की 57 ग्राम सभाओं में सवा सौ सफाई कर्मियों की तैनाती है। बावजूद इसके गांवों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। गांवों में तैनात दर्जन भर सफाई कर्मी हैं कि वह सुबह गांव न जाकर सीधे ब्लॉक पहुंच जाते हैं।
विकास खंड कौशाम्बी में कुल 57 ग्राम सभाएं हैं। इन ग्राम सभाओं की सफाई व्यवस्था चाक चौबंद रखने के लिए डीपीआरओ ने 124 सफाई कर्मियों की तैनाती कर रखी है। इनमें 60 फीसदी गांवों में तैनात सफाई कर्मी अपने तैनाती वाले गांव नहीं जाते। वह ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और एडीओ पंचायत से मिलीभगत कर घर बैठे वेतन निकाल रहे हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि दर्जनभर सफाई कर्मी ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर एडीओ पंचायत के इर्द-गिर्द मंडराते हैं। इनको काम न करता देख गांवों में तैनात अन्य सफाई कर्मी भी मनमानी करने लगे हैं। इससे गांवों में गंदगी का अंबार लग गया है। बानगी के तौर पर गोपसहसा, रसूलपुर बड़गांव, सोंधिया गांवों को लिया जा सकता है। गोपसहसा निवासी राजेंद्र पांडेय, रसूलपुर बड़गांव के सुरेश कुमार व सोंधिया के लवकुश प्रसाद का आरोप है कि गांव की गलियों व नालियों की सफाई पिछले छह माह से नहीं हो रही है। इससे जगह-जगह गंदगी का अंबार लग गया है। मामले में एडीओ पंचायत संतोष पांडेय से पूछा गया तो उनका कहना है कि समय-समय पर हिदायत दी जाती है। जांच में सफाई न मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है।
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भरवारी में क्लियरिंग हाउस न होने से व्यापारी परेशान
एलडीएम से मांग के बाद भी नहीं की जा सकी पहल
भरवारी (ब्यूरो)। व्यापारिक दृष्टि से जिले की प्रमुख बाजार कहे जाने वाले भरवारी में बैंकों की दर्जनभर शाखाएं तो हैं, पर क्लियरिंग हाउस नहीं है। इसके चलते स्थानीय व्यापारियों का चेक क्लियर होने में पखवारे भर का समय लग जाता है। क्लियरिंग हाउस न खोले जाने से व्यापारियों में नाराजगी है।
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नगर पंचायत भरवारी के व्यापारिक महत्व को देखते हुए विभिन्न बैंकों की दर्जन भर शाखाएं संचालित हैं। इन बैंकों में प्रतिदिन लाखों का कारोबार व्यापारियों द्वारा किया जाता है। बैंकों से व्यापारियों को सुविधाएं तो हैं पर चेक से होने वाले लेन-देन को लेकर उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कस्बे में क्लियरिंग हाउस नहीं होने से व्यापारियों को चेक भुनाने के लिए कम से कम पखवारे भर का इंतजार करना पड़ता है। समस्या को लेकर कस्बे के राजेश केसरवानी, चंचल केसरवानी, राजू गुलाटी, मुन्ना लाल आदि व्यापारियों ने कई बार एलडीएम दिनेश मिश्र से मुलाकात कर क्लियरिंग हाउस खुलवाने की मांग किया। बावजूद इसके कस्बे में क्लियरिंग हाउस नहीं खुलवाया गया। इसके चलते हो रही परेशानी को लेकर कस्बे व्यापारियों में नाराजगी है।
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