शरीर तोड़ रहा मलेरिया और टायफाइड
जिला अस्पताल में उमड़ी बीमारों की भीड़, एक हजार से ज्यादा आए मरीज
ओपीडी में लगी रही मरीजों की लंबी लाइन, पैथालॉजी में जांच को मारामारी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
डायरिया पर अब मलेरिया और टायफाइड भारी पड़ने लगा है। वायरल फीवर का कहर घर-घर है। बुखार के साथ बदन दर्द ने जीना मुश्किल कर लिया है। मंगलवार को जिला अस्पताल में एक हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। अधिकांश लोग बुखार से परेशान थे। सबकी जांच करवाई गई। पैथालॉजी में जांच के लिए मरीजों के बीच मारामारी रही। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को हुई।
जिला अस्पताल में मंगलवार को एक हजार से ज्यादा मरीज इलाज कराने आए। पहले पर्चा बनवाने के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए। फिजीशियन के पास सबसे ज्यादा मरीज गए। अधिकांश मरीज वायरल फीवर के रहे। टायफाइड के भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। बुखार के जितने भी मरीज आए, सबकी जांच करवाई गई। खून जांच के लिए मरीज भेजे जाने लगे तो पैथालॉजी के बाहर भीड़ लग गई। वहां काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए धक्कामुक्की तक हुई। पैथालॉजी में मरीजों की लाइन लंबी हुई तो अधिकांश लोगों ने अपनी जांच निजी पैथालॉजी में कराना उचित समझा। जिला अस्पताल की सभी ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। वायरल बुखार की वजह से सबसे ज्यादा परेशान बच्चे दिखे। वे सुस्त बैठे रहे। सिर व बदन दर्द उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। यही हाल मलेरिया टायफाइड के मरीजों का रहा। हालांकि भीड़ ज्यादा होने के कारण दूर दराज से आए मरीजों को तमाम दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। निजी पैथालॉजी के आंकड़े बताते हैं कि एक हफ्ते के भीतर करीब चार सौ लोगों की मलेरिया जांच हुई। इनमें 18 लोगों में मलेरिया पॉजीटिव आया। वहीं करीब 700 मरीजों ने टायफाइड की आशंका में जांच करवाई। इनमें करीब सवा दो सौ लोगों में टायफाइड पाजीटिव रहा। जिला अस्पताल में एक हफ्ते के भीतर टायफाइड के 21 व मलेरिया के दो मरीज पॉजीटिव मिले हैं।
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पर्चा गुम होने पर किया हंगामा
जिला अस्पताल में फिजिशयन कक्ष के बाहर मंगलवार को मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। चतुर्थ श्रेणी कर्मी सभी मरीजों का पर्चा इकट्ठा करके एक-एक मरीज को डॉक्टर के पास बुला रहा था। इसी दौरान करारी से आए रामसेवक का पर्चा गुम हो गया। उसका नंबर काफी देर तक नहीं आया तो उसने कर्मचारी से पूछताछ की। उसने ढेर में उसका पर्चा ढूंढना शुरू किया लेकिन नहीं मिला तो मरीज ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। किसी तरह दूसरा पर्चा बनवाकर उसको अंदर भेजा गया।
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खांसी से भी हलाकान बच्चे
वायरल फीवर के साथ ही खांसी का प्रकोप भी बढ़ा है। बच्चे खांसी की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। सूखी खांसी आने की वजह से बच्चे बेदम हो जा रहे हैं। जिला अस्पताल में ऐसे करीब लगभग दो दर्जन मरीज आए। इनकी भी जांच करवाई गई है। बच्चों की हालत देखकर उनके परिजन खासा परेशान रहे।
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सीएचसी व पीएचसी के बजाय सीधे आए अस्पताल
दूर दराज से आने वाले मरीजों ने डॉक्टरों की लापरवाही का किया खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिला अस्पताल में सोमवार को 1296 मरीज आए थे। मंगलवार को भी एक हजार से ज्यादा मरीज आए थे। दूर दराज से आने वाले मरीजों ने सीएचसी व पीएचसी के डॉक्टरों की लापरवाही का खुलासा किया। मरीजों का कहना था कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलते हैं, इसलिए उन्हें यहां मजबूरन आना पड़ता है।
बड़हरी के रामचंद्र मंगलवार को अपना इलाज कराने जिला अस्पताल आए थे। उन्हें बुखार था। पूछने पर उन्होंने बताया कि पश्चिमशरीरा अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिले तो वह यहां तक आए। कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से उन्हें किराया-भाड़ा देकर आना पड़ा। यही हाल सरायअकिल की लक्ष्मी देवी का रहा। वह अपनी बेटी का इलाज कराने आई थी। जांच के लिए वह इधर-उधर भटक रही थीं। लक्ष्मी देवी ने बताया कि सीएचसी सरायअकिल गई थी, लेकिन उनको यहीं भेजा गया। मजबूरन आना पड़ा। ऐसे तमाम लोग थे, जिनके यहां सीएचसी व पीएचसी हैं, लेकिन वहां इनका इलाज नहीं हो रहा है। जांच के नाम पर ज्यादा से ज्यादा मरीज जिला अस्पताल भेज दिए जा रहे हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि जानबूझकर सीएचसी व पीएचसी का स्टाफ मरीजों का यहां भेजता है। जांच के नाम पर वह मरीजों से पीछा छुड़ाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि यहां अव्यवस्था बन जाती है।
उमरा गांव में बेकाबू हुआ बुखार, आधा दर्जन बीमार
दोपहर बाद पहुंची टीम, जांच के बाद दी दवाएं, दो मरीज जिला अस्पताल में भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। संक्रामक बीमारियों के साथ ही बुखार का कहर तेजी से गांवों में फैल रहा है। उमरा गांव भी इसकी चपेट में आ चुका है। गांव के आधा दर्जन लोग बुखार से पीड़ित हैं। दोपहर को जानकारी होने पर गांव में टीम भेजी गई। जांच के बाद मरीजों को दवाएं दी गईं। दो मरीजों की हालत गंभीर थी, उन्हें जिला अस्पताल लाया गया है।
मंझनपुर के उमरा गांव में वायरल फीवर ने दस्तक दे दी है। इसकी चपेट में आने से मोना देवी (04) पुत्री रामनरेश, राज सिंह (01) पुत्र मलखान सिंह, कौशल्या देवी (25), संदीप (02), राजकुमार (15) पुत्र बृजलाल की हालत खराब थी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी। जानकारी मिलते ही सीएमओ दीपेंद्र मालवीय ने डॉ. नागेंद्र सिंह के नेतृत्व में गांव में टीम भेजी। मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उनको दवाएं दी गईं। मोना व राज सिंह की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। इसके बाद टीम ने गांव में डीडीटी पाउडर का छिड़काव कराया। साथ ही लोगों को हिदायत दी कि वे साफ-सफाई पर ध्यान दें। शुद्ध पानी का इस्तेमाल करें।