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अंध विश्वास: कुपोषित बच्चों का नहीं हो पा रहा एनआरसी में दाखिला

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मंझनपुर। कुपोषित बच्चे मां-बाप के अंध विश्वास के चलते तिल-तिल कर मरने को मजबूर हैं। आंगनबाड़ी, आशा और आरबीएसके टीम के लाख प्रयास के बाद भी मां-बाप बच्चों को पोषण पुर्नवास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराने को राजी नहीं है। सर्वे में लगी टीम और एनआरसी के भर्ती रजिस्टर में जमीन-आसमान का अंतर है।
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आंगनबाड़ी, आशा और आरबीएसके टीम को कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के लिए लगाया गया है। टीम गांवों में कैंप लगाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती है। जो बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में पाए जाते हैं, उनके अभिभावकों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुर्नवास कें द्र में भर्ती कराने की सलाह दी जाती है। यह कुपोषित बच्चों को डायटीशियन सोनाली और चिकित्सक की देखरेख में उचित आहार दिया जाता है। इसके लिए सरकार लाखों रुपये खर्च कर रही है।

बावजूद इसके जिले के लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। खुद बाल विकास विभाग व आरबीएसके टीम के आंकड़े गवाह हैं कि जिले में हर महीने तकरीबन 100 बच्चे कुपोषित मिल रहे हैं। जिसने से 40 फीसदी ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती करना जरुरी होता है। इसके बाद भी एनआरसी में लोग अपने बच्चों को दाखिल नहीं करते। आंकड़ों की माने तो अक्तूर माह में महज दस बच्चे ही इलाज के लिए आए हैं। यहां 20 बेड की व्यवस्था है।
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चिकित्सक के अलावा 24 घंटे कुशल स्टाफ की देखरेख में बच्चों को रखा जाता है। इसके बाद भी अज्ञानता की वजह से लोग अपने बच्चों को यहां भर्ती नहीं कर रहे हैं। एनआरसी के प्रभारी चिकित्सक डॉ. एससी श्रीवास्तव का कहना है कि जिला अस्पताल में 14 दिन तक बच्चों को भर्ती रखकर इलाज किया जाता है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उन्हें डिस्चार्ज किया जाता है।
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