बालू पट्टाधारकों को ब्लैकमेल नहीं कर सकेंगे तराई के भू-स्वामी
-पैदावार का आंकलन कर रास्ते के लिए मुआवजा दिलाएगा प्रशासन
-रास्ते का विवाद निस्तारित करने के लिए लागू की जाएगी नियमावली
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। यमुना की तराई में पट्टेधारकों को रास्ते के नाम पर भू-स्वामी ब्लैकमेल नहीं कर सकेंगे। उन्हें प्रशासन पट्टाधारकों से पैदावार का आंकलन करते हुए मुआवजा दिलाएगा। इसके लिए अब आवंटित किए जाने वाले बालू पट्टों पर खनिज नियमावली को सख्ती से लागू किया जाएगा। इससे पट्टेधारकों और भू-स्वामियों के बीच रास्ते को लेकर आए दिन हो रहा विवाद पर अंकुश लग जाएगा।
जिले में यमुना बालू घाट का पट्टा लेने वालों व तराई के भू-स्वामियों के बीच आए दिन बवाल होता रहता है। भू-स्वामी अपनी भूमिधरी से रास्ता देने के लिए पट्टेधारकों से मोटी रकम या फिर घाट में हिस्से की मांग करते हैं। इस साल ऐसा मामला जिले के कटरी, दलेलागंज व उमरांवा बालू घाटों पर अधिक देखने को मिला। हालात तो यहां तक खराब हुए कि मौके पर गोलीबारी तक हुई। घाटों पर खनिज नियमावली लागू न होने से पट्टा लेने वालों का कठिनाई का सामना करना पड़ा। इसी का नतीजा रहा कि पिछले दिनों 120 बालू घाटों के ई-टेंडर में कारोबारियों ने रुचि नहीं दिखाई। कम टेंडर पड़ने को डीएम मनीष कुमार वर्मा ने गंभीरता से लिया है। दोबारा 118 बालू घाटों का टेंडर निकालने के बाद खनिज नियमावली 1963 के नियम 67 को तराई पर सख्ती से लागू कराने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत तराई में कृषि योग्य भूमि होने पर मुआवजा देने के लिए विगत तीन वर्ष में की गई खेती से प्राप्त औसत आय निकाली जाएगी। निर्धारित मुआवजे को लेकर भू-स्वामी को हर हाल में भूमिधरी से रास्ता देना होगा। यह नियम उन भू-स्वामियों पर लागू किया जाएगा जिनका रास्ते का विवाद उलझेगा। बहरहाल कुछ भी हो खनिज नियमावली 1963 के नियम 67 को लागू कराया गया तो पट्टेधारकों व भू-स्वामियों के बीच विवाद तो रुकेगा ही रास्ते के नाम पर ब्लैकमेलिंग भी नहीं हो सकेगी।
तहसील प्रशासन की रिपोर्ट होगी अहम
बालू पट्टाधारकों को परिवहन के लिए रास्ता देने का काम अब प्रशासन का होगा। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाली किसी भी किसान की भूमिधरी को प्रयोग में लाया जा सकेगा। शर्त यह रहेगी कि रास्ते से संबंधित भू-स्वामी का नुकसान क्या हो रहा है इसे प्रतिकर के रूप में उसे दिलाया जाएगा। नुकसान का औसत आंकलन डीएम तहसील प्रशासन से कराएंगे। तहसील की टीम संबंधित भूमि पर पिछले तीन साल में हुई पैदावार का आंकलन कर औसत आय निकालते हुए मुआवजे का निर्धारण कर भू-स्वामी को लाभ दिलाया जाएगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
बालू घाटों के आठ पट्टों में चार घाट बाहरी कारोबारियों के पास हैं। पांच साल का पट्टा आवंटन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद घाटों पर रास्ते के विवाद रोकने के लिए खनिज नियमावली 1963 के नियम 67 को लागू की जाएगी।
राज रंजन, खनन निरीक्षक