‘अल्सरेटिव फिश सिंड्रोम’ की रोकथाम को मांगुर मछली पर प्रतिबंध
जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा ने दिया निर्देश
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली के निर्देश पर लगाई पाबंदी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। ‘अल्सरेटिव फिश सिंड्रोम’ बीमारी के बढ़ रहे खतरे को लेकर थाई मांगुर प्रजाति की मछली के बिक्री और पालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। बाहरी राज्यों से आयात होकर आने वाली मछली के बीज पर जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा ने पूरी तरह से पाबंदी लगा दिया है।
प्रदेश के मत्स्य निदेशक और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली ने थाई मांगुर प्रजाति की मछली पालन और बिक्री पर रोक लगा दी है। न्यायाधिकरण की रिपोर्ट में कहा गया कि इस मछली के पालन से जलीय पौधे धरती से विलुप्त हो जाएंगे। यह मछली मांसाहारी प्रजाति की है। जिससे जलीय जीव को भी खतरा होता है। इसके अलावा सबसे अहम बात ये है कि इस मछली के कारण प्रदेश में ‘अल्सरेटिव फिश सिंड्रोम’ नामक बीमारी का खतर बढ़ गया है। ऐसे में अन्य राज्यों से आयात होकर आने वाली इस प्रजाति की मछली पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा ने दो फरवरी को जिले में इस मछली के पालन व बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। जिला मजिस्ट्रेट ने इस प्रजाति की मछली बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षकों को भी पत्र भेजा है। इसके अलावा सहायक निदेशक मत्स्य व मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वह प्रभावी रूप से अभियान चलाकर इस प्रजाति के हैचरी में मौजूद स्टाक व मछली मंडी का निरीक्षण कर बीज व मछली का आंकलन करें और हर महीने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजे।
------
क्या कहते हैं सीएमएस
संक्रमित मछली खाने से डायरिया हो सकता है। हालांकि, जिले में ‘अल्सरेटिव फिश सिड्रोम’ जैसी बीमारी के मरीज अब तक नहीं मिले हैं। अगर मरीज मिलते हैं तो उनका इलाज किया जाएगा। डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस
-