मंझनपुर। जिलेभर में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का हाल-बेहाल है। अदालत के आदेश पर राज्य परियोजना निदेशक ने जिले के सभी आठ विद्यालयों की जांच का निर्देश दिया था। पिछले हफ्ते स्कूलों में जांच को पहुंचे उपजिलाधिकारियों ने जो कुछ देखा वह चाैंकाने वाला था। ज्यादातर विद्यालयों में सुरक्षा, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, बिस्तर आदि की कमी दिखी। जबकि सरकार ने इन स्कूलों की छात्राओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का फरमान जारी कर रखा है। अफसरों की जांच रिपोर्ट आने के बाद महकमे में खलबली है।
कौशाम्बी ब्लॉक के म्योहर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में छात्राओं को शुद्ध पीने का पनी भी नहीं मिल रहा है। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में यहां फौरन आरओ लगवाने की जरूरत बताई है। एक कमरे में बच्चे दरी पर बैठते हैं और छत से पानी टपकता है। स्कूल में बच्चों के बैठने व खाने की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। स्कूल भवन की 70 खिड़कियों के शीशे टूटे हैं और लाइट की वायरिंग खराब है। दस तखत भी टूटे हैं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सरसवां में छात्राओं की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में यहां 24 घंटे महिला होमगार्ड की आवश्यकता बताई है। विद्यालय के पांच बाथरूम व एक वाशरूम का दरवाजा टूटा है। वाशरूम में लीकेज है। इससे छात्राओं को काफी परेशानी हो रही है। परिसर में गंदगी के कारण मच्छर तेजी से पनप रहे हैं। इससे विद्यालय की खिड़कियों में मास्कीटो नेट लगवाने की जरूरत है।
नेवादा ब्लॉक के डहिया गांव में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मिश्रपुर डहिया में तो समस्याओं का अंबार है। यहां के सभी शौचालय चोक हैं। छात्राओं को खुले में शौच जाना पड़ता है। स्नान भी बाहर अथवा छत पर करने को मजबूर हैं। जो असुरक्षित है। विद्यालय की छत व फर्श टूटी हैं। बारिश में पानी टपकता है। तखत, चद्दर, फर्नीचर की भी जरूरत है। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में ढेरों खामियां मिलीं। वहीं प्रभारी बीएसए का कहना है कि आवासीय बालिका विद्यालयों के भवन आदि पुराने होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं। राज्य परियोजना निदेशक के निर्देश पर जांच कराकर रिपोर्ट भेज दी गई है। बजट मिलते ही व्यवस्थाएं दुरुस्त करा दी जाएंगी।