मंझनपुर। मामूली बात पर दलित युवक की पिटाई करने के एक मामले में गुरुवार को एससीएसटी अधिनियम की विशेष अदालत ने पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
कौशाम्बी कोतवाली क्षेत्र के झड़िया का पूरा (बेरौंचा) गांव की बदामा देवी ने बताया कि चार मई 2005 को वह और उसका पति मोतीलाल बाग में महुआ बिन रहे थे। इस दौरान पड़ोसी लालता तिवारी के बैल आकर महुआ खाने लगे। यह देख बदामा ने भैलों को खदेड़ दिया। इसी बात से नाराज लालता गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर अपने परिवार के ही शिवमन तिवारी, राजमन तिवारी, राजकरन तिवारी व वकील उर्फ देवमन के साथ मिलकर बदामा के पति की पिटाई शुरू कर दी।
जान बचाने के लिए पीड़ित भागकर गांव के ही भुल्लू पासी के घर में घुस गया तो हमलावरों ने दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाल लिया। फिर दौड़ा-दौड़ाकर पिटाई की। मामले में बदामा देवी की तहरीर पर सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। केस की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। गुरुवार को एससीएसटी अधिनियम की विशेष अदालत के जज अनुपम कुमार ने प्रकरण की सुनवाई की। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को ताउम्र कैद और दस-दस हजार रुपया जुर्माने की सजा सुनाई।