मुहाने पर ही पनचक्की व खांदी कटने से आगे नहीं बढ़ रहा पानी
अगेती फसलों की सिंचाई को लेकर किसान हलाकान
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। किशनपुर पंप कैनाल चालू होने के सप्ताह भर बाद भी सिंचाई के लिए माइनरों में पानी नहीं पहुंच सका। मुहाने पर जगह-जगह पनचक्की व खांदी काट दिए जाने से पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। माइनरों में पानी नहीं पहुंचने से गेहूं के अगेती फसल की बुवाई कर चुके किसान सिंचाई को लेकर हैरान परेशान हैं। विभागीय जिम्मेदार हैं कि वह टेल तक पानी पहुंचाने को लेकर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं।
सिल्ट सफाई के नाम पर इस बार किशनपुर पंप कैनाल सप्ताह भर देर से चालू हुई। इसके चलते नहरी क्षेत्र के 50 फीसदी खेत पलेवा के अभाव में बंजर पड़े हुए हैं। नहरी क्षेत्र में किसान किसानों के खेतों के इर्द-गिर्द निजी नलकूप है उन्होंने किसी तरह पलेवा करके गेहूं की अगेती फसल की बुवाई कर रखी है। 17 दिसंबर को किशनपुर पंप कैनाल चालू होने के बाद किसानों में उम्मीद जगी कि सिंचाई और पलेवा के लिए माइनरों व रजबहों में दो-चार दिन के भीतर पानी आ जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। माइनरों व रजबहों में मुहाने पर पानी पहुंचा तो जगह-जगह खांदी काटकर या फिर पनचक्की लगाकर किसानों ने पलेवा व सिंचाई शुरू कर दिया। इसके चलते टेल की ओर पानी नहीं बढ़ पा रहा है। माइनरों व रजबहों में नहर चालू होने के सप्ताह भर बाद भी पानी नहीं पहुंचने पर अब किसानों की फसलें सिंचाई के अभाव में नष्ट हो रही हैं। फसलों की सिंचाई के लिए किसान निजी नलकूप पर लाइन लगाए हुए हैं पर समय से पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा जिन खेतों का पलेवा नहीं हो सका उसकी बुवाई का समय भी खत्म हो रहा है। इसे लेकर नहर क्षेत्र के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। बानगी के तौर म्योहर माइनर, घोषिया माइनर व बंधुरी रसूलीपुर माइनर को लिया जा सकता है। इन माइनरों में सिंचाई और पलेवा के लिए पानी मुहाने से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। कमालपुर मजरा म्योहर के किसान महरानीदीन, गोलकाई, म्योहरिया के किसान त्रिलोक सिंह आदि का कहना है कि किशनपुर पंप कैनाल सिंचाई के ऐन वक्त पर कभी साथ नहीं देती। यही कारण है कि नहरी क्षेत्र के किसानों को कभी भी फसलों की भरपूर पैदावार नहीं मिल पाती है। सिंचाई विभाग के जिम्मेदार हैं कि वह माइनरों व रजबहों में लगी पनचक्की व जगह-जगह कटी खांदी को लेकर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं।
कोढ़ में खाज का काम कर रही अघोषित विद्युत कटौती
नहरी क्षेत्र के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए दूसरा संसाधन निजी नलकूप हैं। माइनरों व रजबहों में पानी नहीं आने के बाद किसानों के पास निजी नलकूप ही एक मात्र सहारा है। नहर में पानी आने के इंतजार में बैठे किसानों के हाथ जब मायूसी लगी तो वह निजी नलकूपों से सिंचाई करने के लिए लाइन लगाने लगे। उधर सिंचाई के ऐन वक्त पर शुरू हुई बिजली कटौती कोढ़ में खाज का काम करने लगी। खरसेन का पूरा के निजी नलकूप स्वामी रामचंद्र का कहना है कि कटौती के चलते आधे-अधूरे खेतों में दोबारा पानी जाता है। इससे फसल में पानी लगने का खतरा तो रहता ही है पर्याप्त खेतों की सिंचाई भी नहीं हो पाती है।
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इनका कहना है
प्रमुख नहर के छह पंप चालू हैं। माइनरों व रजबहों में धीरे-धीरे पानी बढ़ रहा है। माइनरों की पटरी काटकर यदि कहीं सिंचाई की जा रही है तो उसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आरके निरंजन, एक्सईएन सिंचाई