आलू की पिछेती खेती पर मौसम की मार
-कोहरे से फसल पर मंडराया झुलसा रोग का खतरा
-समय पर उपाय न करने पर प्रभावित हो सकता है उत्पादन
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अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
आलू की पछेती खेती पर मौसम की बेरुखी भारी पड़ सकती है। दो दिन से जिले में पड़ रहे कोहरे से आलू की फसल में झुलसा रोग लगने का खतरा मंडराने लगा है। समय रहते किसानों ने बचाव व रोकथाम का उपाय न किया तो मंदी के साथ-साथ उत्पादन में गिरावट आना तय है।
दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह में मौसम ने रंग बदलना शुरू कर दिया है। गुरुवार शाम से शुरू हुई कोहरे की धुंध दूसरे दिन भी छाई रही। दोपहर में गुनगुनी धूप निकलने के बाद चार बजे से फिर धुंध छा गई। मौसम की यह बेरुखी आलू की पछेती खेती करने वाले किसानों पर भारी पड़ सकती है। जानकारों की मानें तो कोहरा आलू की पत्तियों पर जमा हो जाता है। ठंडे मौसम में तापमान में गिरावट आने के चलते आलू की फसलों में झुलसा रोग लग जाता है। इससे आलू के पौधों की पत्तियां व तना मुरझा जाता है। तने व पत्तियों के मुरझाने का असर सीधे उत्पादन पर पड़ता है। कच्चे समय में रोग लगने से आलू समान रूप से विकास नहीं कर पाते और छोटे-छोटे रह जाते हैं। इससे उत्पादन की मात्रा आधे से भी कम हो जाती है। खराब हुए मौसम को लेकर समय पर सचेत न होने वाले किसान आलू में छाई मंदी की मार तो झेल ही रहे हैं, खुदाई के दौरान उन्हें कम पैदावार का दंश भी भुगतना पड़ सकता है।
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चना, अरहर व मटर की खेती भी होगी प्रभावित
मौसम के बदले मिजाज का असर आलू के अलावा रबी की अन्य फसलों पर भी पड़ सकता है। इसमें चना, मटर व अरहर की फसलें प्रमुख रूप से शामिल हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सर्द मौसम में फूल ले चुकी मटर, अरहर व चना की फसलों पर कोहरे का बुरा असर पड़ता है। फूलों पर कोहरे की बूंदे देर तक जमा रहने से फूल परागण से पहले ही मर जाते हैं। इससे तने में फली नहीं लगती। ऐसे में खराब मौसम की मार से बचने के लिए किसानों को समय पर कारगर उपाय करना होगा।
बचाव के लिए क्या करें किसान
आलू सहित कोहरे से प्रभावित होने वाली रबी की फसलों का बचाव आसानी से किया जा सकता है। वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-ए (कृषि रक्षा) कौशांबी का कहना है कि किसान आलू की फसलों में मैंकोजेब, प्रोपीनेब, क्लोरोथेलोनील को निर्धारित अनुपात में पानी मिलाकर पौधे पर छिड़काव करें। यदि फसल पर बीमारी नजर आने लगी है तो फेनोमिडोन प्लस मैंकोजेब की प्रति हेक्टेयर की दर से तीन किलो मात्रा को एक हजार लीटर पानी में छिड़काव कराएं। इसके अलावा नजदीकी कृषि रक्षा इकाई से सलाह लेकर फसलों को जरूरत के हिसाब से दवाओं का छिड़काव कराकर झुलसा व फफूंदी रोगों से बचाएं।