लापरवाही: वजीफा से वंचित हो गए 4711 छात्र-छात्राएं
कॉलेज संचालकों की ओर से संशोधित डाटा नहीं मुहैया कराने पर निरस्त किए गए आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कॉलेजों की लापरवाही दोआबा के हजारों छात्र-छात्राओं पर भारी पड़ गई। अब उन्हें वजीफे का लाभ नहीं मिलेगा। डाटा में गड़बड़ी के कारण करीब 4711 छात्रों के आवेदन संबंधित विभागों ने निरस्त कर दिए हैं। अब वंचित छात्र-छात्राएं कॉलेज और विभागों के चक्कर लगा रहे हैं।
वर्ष 2018-19 में वजीफा के लिए 23452 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था। इसमें सामान्य वर्ग के करीब 4108, पिछड़ा वर्ग के 10855 मथा अनुसूचित जाति के 8489 छात्र-छात्राएं शामिल थी। इन सभी का डाटा सत्यापन का कार्य समाज कल्याण, एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को किया जाना था। सत्यापन के दौरान इस डाटा में कमियां थीं। किसी का अनुक्रमांक गड़बड़ था तो किसी का परिणाम विश्वविद्यालय की बेवसाइट से मेल नहीं खा रहा था। ऐसे में सत्यापन करने वाले विभागों के लिए उनकी सत्यता की जांच करना संभव नहंी था। इस डाटा को संशोधित करने के लिए संबंधित कॉलेजों को सूची भेजी गई। डाटा संशोधित करने के बाद दोबारा से यह सूची समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को उपलब्ध कराई गई। लेकिन इसमें सभी छात्रों का संशोधित डाटा नहीं दिया गया। इसके चलते विभाग ने 4711 छात्र-छात्राओं के वजीफे के आवेदन निरस्त कर दिए। इसमें सामान्य वर्ग के तकरीबन 986, पिछड़ा वर्ग 1974 तथा अनुसूचित जाति के 1751 आवेदन शामिल हैं। छात्र-छात्राओं को इसकी तब जानकारी हुई जब उनके मोबाइल पर आवेदन निरस्त होने का मैसेज पहुंचा। ऐसे में अब वंचित छात्र-छात्राएं कॉलेज व विभागों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन एक बार आवेदन निरस्त होने के बाद उसे सही किया जाना संभव नहीं है। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि कॉलेजों को तीन-तीन बार रिमाइंडर भेजा गया, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। ऐसे में गड़बड़ डाटा वाले आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। कमोवेश यही हाल अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का भी है। यहां आए आवेदनों में से करीब 1004 छात्रों के डाटा गड़बड़ बताए जा रहे हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि कॉलेजों को सूची भेज दी गई है। अंतिम डेट 26 फरवरी तक इंतजार करने के बाद आवेदन निरस्त कर दिए जाएंगे।
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सीधे नहीं कराए जा सकते संशोधित
अगर कोई छात्र सीधे अपने वजीफे का डाटा संबंधित विभाग से संशोधित कराना चाहे तो यह संभव नहीं है। इसके लिए कॉलेज द्वारा ही संशोधित डाटा आगे भेजा जाता है। विभाग के अनुसार इसमें कॉलेज संचालक हर मर्तबा लापरवाही करते हैं। इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है।