फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

17 लाख खर्च फिर भी अंधेरे में गांवों की गलियां

विज्ञापन
विज्ञापन
17 लाख खर्च फिर भी अंधेरे में गांवों की गलियां
विज्ञापन

कौशाम्बी विकास खंड के 57 गांवों में लगवाई गई थी स्ट्रीट लाइट
ज्यादातर गांवों की लाइट हुई खराब, जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला
अमर उजाला ब्यूरो
बारा। कौशाम्बी विकास खंड के 57 गांवों में करीब 17 लाख सरकारी खजाने से खर्च कर लगवाई गई स्ट्रीट लाइटें शोपीस बनकर रह गई है। ज्यादातर गांवों में लाइट खराब हो चुकी हैं। विकास विभाग के जिम्मेदार लाइट सही कराने के मामले में पल्ला झाड़ रहे हैं।
विज्ञापन

क्षेत्र के गांवों में पिछले दिनों राज्य वित्त व 14 वें वित्त से प्रधान और सेेकेट्ररी ने स्ट्रीट लाइट लगवाई गई। 57 गांवों में 668 लाइट लगाई गई। प्रति लाइट की कीमत 25 सौ रुपये का भुगतान किया गया। यह लाइट बिजली से जलती थी। प्रधान और सेकेट्ररी के संयुक्त खाते से कार्यदायी संस्था को भुगतान भी कर दिया गया। इसके बाद भी ज्यादातर गांवों में लाइट नहीं जल रही है। विकास खंड के मुस्तफाबाद, बेरौंचा, गोइडा, मकदूमपुर ढोकसहा, विदांव, भटवरिया, कायमपुर, सोधिया आदि गांवों में लाइट खराब हो चुकी हैं। भटवरिया के अंकित त्रिपाठी, सोधिया के मनीष कुमार, विदांव के राजेश कुमार और कायमपुर के जयकरन सिंह का कहना है कि लाइट कौन ठीक कराएगा? इस पर प्रधानों का जवाब होता है कि लाइटें दो साल की वारंटी पर है। लकिन लाइट कब सहीं होगी। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सबसे हैरानी की बात यह है कि विकास विभाग के जिम्मदारों को यह तक नहीं मालुम कि किस कार्यदायी संस्था से लाइटें लगवाई गई और कब। एडीओ पंचायत प्रेम नरायण का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही ब्लाक का चार्ज लिया है। लाइटें उनके पहले लगाई गई थी। वहीं बी़डीओ हरिश्चंद्र सिंह का कहना है कि ब्लाक में लाइटों के बारे में जानकारी नहीं है। प्रधान और पंचायत सेकेटरी ने लाइट कैसे और किससे लगवाई। इसकी जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें