रामराज बैठे त्रैलोका, हर्षित भए गए सब शोका
राज्याभिषेक के साथ 86 वर्ष पुरानी रामलीला संपन्न
सरायअकिल (ब्यूरो)। नगर पंचायत सरायअकिल की 86 वर्ष पुरानी रामलीला का मंचन गुरुवार की रात राम के राज्याभिषेक की लीला के साथ संपन्न हो गया। राज्याभिषेक होते ही मंचन स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। रामलीला के सकुशल मंचन पूर्ण होने पर कमेटी के पदाधिकारियों ने खुशी जाहिर की। इस मौके पर मंचन स्थल दर्शकों से खचाखच भरा रहा।
गुरुवार रात कलाकारों ने राम राज्याभिषेक की लीला का मंचन किया। मंचन के इस नजारे को देखने के लिए कस्बे के अलावा इलाके के ग्रामीणों की भारी भीड़ मंचन स्थल पर उमड़ी। रावण का बध कर अयोध्या लौटे भगवान श्रीराम को भरत ने उनकी राजगद्दी सौंपी दी। राज्याभिषेक ‘प्रथम तिलक वशिष्ठ मुनि कीन्हा, पुनि सब विप्रन्ह आयुष दीन्हा’ के दौरान पहला तिलक वशिष्ठ मुनि ने लगाया। इसके बाद सभा में मौजूद सभी ब्राह्मणों ने आशीर्वाद दिया। इसके बाद कमेटी के अध्यक्ष गोपाल जी केसरवानी, पूर्व विधायक शिवदानी ने भगवान राम की विधि विधान से पूजा करते हुए रामलीला मंचन का समापन किया। इस मौके पर अनिल केशरवानी, शंकर लाल, संदीप पाठक, राजू पांडेय, कृष्ण नारायण रस्तोगी, संतोष स्वर्णकार, गौरी शंकर मोदनवाल सहित कस्बे के सभी गणमान्य लोग मौजूद रहे। रामलीला मंचन सकुशल संपन्न होने पर कमेटी के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों को एक-एक शाल व शील्ड देकर सम्मानित किया गया।
महर्षि की तपस्या से हिल उठा देवराज का सिंहासन
नारद मोह के भावपूर्ण मंचन के साथ शुरू हुई करारी की रामलीला
मंझनपुर (ब्यूरो)। नगर पंचायत करारी की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन गुरुवार रात नाराद मोह की लीला के साथ शुरू हो गया। इसे देखने के लिए पहले दिन ही दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। मंचन में नारद की तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन हिल उठा। इस नजारे का दर्शकों ने पहले दिन खूब लुत्फ उठाया।
नगर पंचायत करारी की रामलीला में गुरुवार को नारद मोह का मंचन किया गया। उत्तर भारत के कोने-कोने से आए चुनिंदा कलाकारों ने पहले दिन से ही मंचन के जरिए समा बांधना शुरू कर दिया। कथा में कलाकारों ने दर्शाया कि हिमालय की सुंदर वादियां देवर्षि नारद का मन मोह लेती हैं और वहीं तपस्या करने लगते हैं। उनके तपोबल से देवराज इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इस पर देवराज ने कारण पता लगाने के लिए अपने परम सेवक कालादेव को पृथ्वी लोक में भेजा। सिंहासन हिलने का कारण महर्षि की तपस्या पता चलने पर इंद्र ने तपस्या भंग करने के लिए कामदेव, उर्वसी, रंभा, मेनका आदि अप्सराओं को भेजा। तप भंग नहीं होने पर कामदेव नारद मुनि के चरणों में गिर पड़े। इस पर नारद जी को कामदेव पर विजय पाने का घमंड हो गया। नारद जी से इस विजय पर रहा नहीं गया और ब्रह्मा व शिवजी के मना करने के बावजूद उन्होंने इसकी जानकारी विष्णु भगवान को दे दी। विष्णु ने माया नगरी की रचना करते हुए शीलनिधि की पुत्री विश्वमोहिनी का स्वयंवर रचा दिया। नारद जी ने कन्या का हाथ देखा तो पता चला कि जिसके साथ उसकी शादी होगी वह प्रतापी होगा। इस पर नारद जी भगवान विष्णु के पास सुंदर रूप मांगने के लिए पहुंचे। विष्णु ने उन्हें वानर रूप दे दिया। वानर रूप लेकर स्वयंवर में पहुंचे नारद जी को उपहास का सामना करना पड़ा। इस पर नारद जी ने विष्णु व उपहास करने वाले दो गणों को शाप दे दिया। पहले दिन की लीला में नारद के वानर स्वरूप व स्वयंवर की लीला देखा दर्शक गदगद रहे।
अझुवा में ताड़का, मारीच, सुबाहु बधव व फलवारी लीला संपन्न
मंचन देखने के लिए उमड़ रही दर्शकों की भीड़
अझुवा (ब्यूरो)। नगर पंचायत अझुवा में दशहरा मेले को लेकर आयोजित की जा रही रामलीला देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। गुरुवार रात कलाकारों ने ताड़का, मारीच सुबाहु वध व फुलवारी लीला का मंचन किया गया। मंचन देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी।
नगर पंचायत अझुवा का दशहरा मेला 10 व 11 अक्तूबर को आयोजित होगा। मेले से पहले हर साल की भांति इस साल भी तीन अक्तूबर से रामलीला का मंचन नारद मोह के साथ शुरू हुआ। गुरुवार रात तीसरे दिन कलाकारों ने ताड़का, मारीच व सुबाहु वध व फुलवारी लीला का मंचन किया। मंचन देखने के लिए जुटे दर्शकों ने राक्षसों का वध होने पर जय श्रीराम का जयकारा लगाया। श्रीराम लीला कमेटी के अध्यक्ष शंकर लाल केसरवानी ने बताया कि शुक्रवार रात धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया जाएगा।