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खून की कमी से जूझ रहे 40 हजार बच्चे

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खून की कमी से जूझ रहे 40 हजार बच्चे
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। दोआबा का हर चौथा बच्चा कुपोषण से पीड़ित है। जांच में करीब 40 हजार बच्चों में खून की कमी पाई गई है। इनमें से तकरीबन 4729 की हालत खराब है। अति कुपोषित इन बच्चों पर विशेष निगाह रखते हुए स्वास्थ्य सुधार की कवायद कर रहा है।
राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना के तहत अभियान चलाकर छह वर्ष तक के बच्चों का न सिर्फ वजन किया जाता है बल्कि विभिन्न प्रकार की जांच भी स्वास्थ्य विभाग व आंगनबाड़ी की संयुक्त टीम द्वारा की जाती है। इसके अलावा कुपोषित बच्चे न पैदा हों। इसके लिए गर्भवती महिलाओं की आंगनबाड़ी व आशाओं द्वारा गर्भधारण के दौरान ही न सिर्फ बेहतर देखभाल की जाती है बल्कि पास के सरकारी अस्पताल में उनका पंजीकरण कराकर समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी कराई जाती है। यदि खून की कमी होती है तो न सिर्फ आयरन की गोलियां दी जाती हैं बल्कि, पौष्टिक आहार दिए जाने पर भी जोर दिया जाता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि बीते दिसंबर माह में राष्ट्रीय पोषण स्वास्थ्य मिशन के तहत अभियान चलाया गया था। इस दौरान एक लाख 68 हजार 115 बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण हुआ था। इसमें चार हजार 725 बच्चे अतिकुपोषित हैं। जबकि 35 हजार 604 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। बताया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों व आंगनबाड़ियों को निर्देशित किया गया है कि जो बच्चे कुपोषित व अति कुपोषित श्रेणी में चिंहित किए गए हैं, उनके पुष्टाहार में वृद्धि की जाए। सामान्य बच्चों को प्रतिमाह तीन पैकेट व कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को पांच-पांच पैकेट दिए जाने का निर्देश संबंधित क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों को दिया गया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि अतिकुपोषित श्रेणी के जो बच्चे अति गंभीर हैं, उन्हें जिला अस्पताल में राज्य पोषण पुनर्वास केंद्र में ले जाकर इलाज कराएं।
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महीने भर में 76 बच्चों की सुधरी सेहत
मंझनपुर। नवंबर में चिंहित कुपोषित, अति कुपोषित बच्चों को लेकर बाल विकास पुष्टाहार व स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता दिखाई। इन्हें जरूरी आहार मुहैया कराने के साथ ही दवा-इलाज की व्यवस्था की गई। नतीजतन महीने भर के बाद इनमें से 76 बच्चे स्वस्थ होकर सामान्य की श्रेणी में आ गए।
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