सिराथू। नगर पंचायत सिराथू ने भू-माफिया के खिलाफ छेड़े गए अभियान में बड़ी कामयाबी हासिल की है। उसने अपनी 32 बीघा बेशकीमती भूमि पर फिर से मालिकाना हक प्राप्त कर लिया है। इस जमीन पर 25 साल से स्थानीय सफेदपोशों का कब्जा था। उन्होंने हेराफेरी करके इस जमीन को भू-अभिलेखों में अपनों का नाम दर्ज करा रखा था। चकबंदी कोर्ट से आए फैसले के बाद भू-अभिलेख में काश्तकारों के नाम खारिज करके इस जमीन को फिर से नगर पंचायत की बंजर भूमि में रूप में दर्ज कर दिया गया है।
बता दें कि नगर पंचायत सिराथू में बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि खाड़ी पड़ी थी। इस बेशकीमती जमीन पर स्थानीय भू-माफियाओं ने दस्तावेज में खेल करके अपनों के नाम दर्ज करा लिया था। नगर पंचायत ने भू-माफिया के खेल के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था। अधिशासी अधिकारी लालचंद्र मौर्य ने बताया कि नगर पंचायत की 32 बीघा भूमि सिराथू पावर हाऊस के पास स्थित है। इस जमीन को स्थानीय भू-माफिया ने सरकारी दस्तावेज में हेराफेरी कराकर अपनोें का नाम दर्ज करा लिया था। नगर पंचायत ने इस मामले का चकबंदी कोर्ट में वाद दाखिल किया था। करीब 20 साल तक कोर्ट का चक्कर लगाने के बाद सात जनवरी को चकबंदी कोर्ट का फैसला नगर पंचायत के पक्ष में आ गया। ईओ के मुताबिक अपने निर्णय में चकबंदी अधिकारी ने सभी 14 काश्तकारों के नामों को खारिज कर दिया। साथ ही सरकारी भूमि से काश्तकाराेें का नाम काट कर उसे सरकारी रिकार्ड में बतौर बंजर भूमि दर्ज करने का आदेश पारित किया है।
चकबंदी कोर्ट से आए फैसले के बाद राजस्व विभाग ने अपने राजस्व अभिलेख से त्रिलोकी नाथ, तीरथराज, सरोज देवी, सलीमुन्निशा, वहीदुन्निशा, सूर्य भवानी, मिनहाज उद्दीन, एकरामउद्दीन, मोहम्मद इसरार, मूनसाद अहमद समेत 14 काश्तकाराेें का नाम काटकर इस जमीन को नगर पंचायत के बंजर भूमि के रूप में दर्ज कर दिया है। नगर पंचायत के चेयरमैन राजेंद्र कुमार ने बताया कि नगर की भूमि पर भी किसी का कब्जा नहीं रहने दिया जाएगा। जांच कराकर जमीनों से अतिक्रमण हटवाने का अभियान चलेगा।