फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaushambi News: विकास के नाम पर 30 करोड़ खर्च, न बदली विस्तारित क्षेत्र की सूरत

Sun, 08 Oct 2023 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
विज्ञापन
विज्ञापन
भरवारी। करीब सात साल पहले नगर पालिका परिषद भरवारी का अंग बने आसपास के करीब 29 गांव अब भी विकास की बाट जोह रहे हैं। पालिका प्रशासन की ओर से इन गांवों में 30 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया जा रहा है।
विज्ञापन


सितंबर वर्ष 2017 में नगर पंचायत भरवारी को नगर पालिका परिषद का दर्जा मिला था। उस वक्त नगर क्षेत्र में 12 वार्ड थे। अब वार्डों की संख्या बढ़कर 25 हो गई। आसपास के 29 गांव भी नगर पालिका का हिस्सा बन गए। नगर से जुड़ने के बाद विकास में काफी पिछड़े इन गांवों की करीब 90 हजार आबादी के चेहरे खिल गए थे। लोगों को लगा था कि पेयजल, सड़क, सीवर, जलनिकासी जैसी प्रमुख समस्याओं का समाधान होगा। सात सालों बाद भी हालातों में बहुत बदलाव न होने से अब इनमें मायूसी है।

कहने के लिए तो अफसर इन विस्तारित क्षेत्रों के विकास पर 30 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई विशेष बदलाव नजर नहीं आ रहा है। पेयजल संकट, सड़कों की बदहाली, मार्ग प्रकाश की कमी और जलनिकासी जैसी जरूरी सुविधाओं से यहां के लोग वंचित हैं।
विज्ञापन


विकास को तरस रहे ये मोहल्ले

नगर पालिका परिषद के विस्तारित क्षेत्र के बालकमऊ, परसरा, चकसईगंज, मोहम्मदपुर असवां, फरीदपुर अशोकपुर, महेशपुर, अयाजमऊ, चमंधा, दरियापुर मझियावां, भिसियापुर, मौली, चकमाह पांडेयमऊ, दरवेशपुर, सइंता, धन्नी, रसूलपुर काजी, पल्हाना समेत अन्य मोहल्ले विकास की राह देख रहे हैं।



पुरानी बस्ती को चमकाने पर दिया जोर

नगर पालिका परिषद भरवारी को प्रतिमाह करीब दो करोड़ रुपये राज्य वित्त से और साल में लगभग चार करोड़ रुपये 15वें वित्त की निधि से मिलते हैं। राज्य वित्त से ही अधिकारियों और कर्मचारियों के भुगतान के अलावा अन्य खर्च होते हैं। शेष बजट विकास पर लगाया जाता है। हालांकि शुरुआत के दो साल पालिका को बजट कम मिला। वर्ष 2019 से व्यवस्था पटरी पर आई। अफसरों का पूरा फोकस सिर्फ पुराने वार्डों को चमकाने पर रहा। विकास को तरस रहे इलाकों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। पंप हाउसों की स्थापना, सड़कों के निर्माण और स्ट्रीट लाइट लगवाने के कुछ काम हुए तो जरूर, लेकिन वह नाकाफी रहे।


मोहल्ला जब गांव था तब भी जलनिकासी की समस्या से जूझते थे और अब जब नगर पालिका परिषद का हिस्सा बन गए हैं, तो भी यह दिक्कत दूर नहीं हो सकी है। कैसे कहें कि विकास हुआ है।-मनोज कुमार, देहदानी रमाशंकर नगर सिधिंया


ग्राम पंचायत के दौर में जो सड़कें बनीं थीं, वही विकास का अहसास कराती हैं। सीमा विस्तार के बाद कोई विशेष काम नहीं हुआ। दो-तीन सड़कें जरूर दुरुस्त कराई गई हैं, लेकिन बदहाल गलियों की संख्या ज्यादा है।- दुखीलाल, धर्मराज नगर

-
पालिका में शामिल होने के बाद झाड़ू तो रोज लगने लगी है, लेकिन इसमें भी खानापूरी की जाती है। नालियां कूड़े से पटी रहती हैं, जिन्हें पालिका साफ नहीं कराता। फाॅगिंग भी नहीं होती है।- राम प्रसाद, मोतीलाल आजाद नगर


विस्तारित क्षेत्रों में पेयजल एक बड़ी समस्या है। विकास दिखाने के लिए पंप हाउस तो बनवा दिए गए, लेकिन इनकी पाइप लाइन बिछाने में मनमानी हुई। इसकी वजह से लोगों को पंप हाउसों का फायदा नहीं मिल रहा है।- अंकुर मिश्रा, रामनगर


विस्तारित क्षेत्रों में अब तक करीब 30 करोड़ रुपये से सड़क, पेयजल, मार्ग प्रकाश, जलनिकासी आदि से जुड़े विकास कार्य कराए गए हैं। इसके अलावा भी तमाम विकास कार्यों का खाका खींचा गया है। बोर्ड की बैठक में स्वीकृति भी मिल गई है। उम्मीद है कि इसी महीने काम शुरू हो जाएंगे।- सुनील मिश्रा, ईओ नगर पालिका परिषद भरवारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें