मंझनपुर (ब्यूरो)। पूत कपूत भले हों मगर माता कुमाता नहीं होती...। मां की ममता को चरितार्थ करने वाली इस पंक्ति के मायने भी स्वार्थपरक समाज में शायद बदल गए हैं। कुछ ऐसा ही सोचने के लिए सिराथू क्षेत्र की एक महिला ने मजबूर कर दिया है। उसने पति की मौत के बाद अपने तीन मासूम बच्चों को लावारिस छोड़ दूसरे व्यक्ति का दामन थाम लिया। इतना ही नहीं उसने बच्चों के हक पर डाका डालते हुए पहले पति के हिस्से की सारी जमीन भी बेच डाली। इससे उसके बच्चे दर--दर भटकने को मजबूर हैं। परेशान बच्चों ने शुक्रवार को डीएम और एसपी को प्रार्थनापत्र देकर न्याय की गुहार लगाई।
सिराथू तहसील क्षेत्र के कनवार गांव के हरिमोहन सिंह की मौत हो चुकी है। उसके 4 बच्चे हैं बीना सिंह (24), रीना देवी (17), मीना देवी (14) और रजोला उर्फ शिवगोविंद (12)। बड़ी बेटी बीना की शादी हो चुकी है। दूसरे नंबर की बेटी रीना ने बताया कि 23 फरवरी 2009 को उसके पिता की मौत हो गई थी। 16 नवंबर को उसकी मां फतेहपुर के एक व्यक्ति के साथ बतौर पत्नी रहने लगी। उसने तीनों भाई-बहन को लावारिस छोड़ दिया। सूचना पर आई बड़ी बहन उन्हें अपने घर ले गई। तब दीदी ने घर, खेत और बाग गांव के ही एक व्यक्ति को देखरेख के लिए दे दिए थे। उपज का पैसा उन्हें दे देता था। इसी से भाई-बहनों की पढ़ाई आदि का खर्च चलता था।
आरोप है कि जब वे सब बड़ी बहन के घर रहने चले गए तो मां ने चुपचाप पिता के हिस्से की सारी जमीन और बाग बेच डाले। गर्मी की छुट्टी में जब वे लोग बड़ी बहन के साथ घर आए तो उन्हें मां की इस करतूत की जानकारी हुई। भुक्तभोगी बच्चों का आरोप है कि उन्होंने इसकी शिकायत सैनी कोतवाली में की लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। न्याय के लिए कोतवाली का चक्कर लगाकर थक चुके बच्चों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र दिया। डीएम ने एसडीएम सिराथू को प्रकरण की जांच कराकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।