सियासी अखाड़े में कूदीं उम्मीदवारों की पत्नियां
महिलाओं की टोली संग गांवों में पहुंचकर कर रहीं प्रचार, औरतों पर फोकस
बेटे, बेटियों के साथ अन्य रिश्तेदारों ने भी प्रचार में झोंकी ताकत
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। लोकसभा चुनाव के मैदान में अब उम्मीदवारों की पत्नियां भी कूद पड़ी हैं। महिलाओं की टोली संग गांवों में पहुंचकर वह अपने सुहाग के लिए वोट मांग रही हैं। प्रत्याशियों के बेटे, बेटियां और अन्य करीबी रिश्तेदारों ने भी प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है।
कौशाम्बी में लोकसभा चुनाव के लिए छह मई को मतदान होना है। प्रचार-प्रसार का सिलसिला चार अप्रैल की शाम से थम जाएगा। इस हिसाब से अब सिर्फ चार दिन शेष बचे हैं। इसे देखते हुए तकरीबन सभी दलों के उम्मीदवारों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। गांवों का भ्रमण करने के साथ उम्मीदवारों का ज्यादा फोकस अब वोट के ठेकेदारों पर है। यूं समझें कि प्रधानों, नगर अध्यक्षों, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, जिपं अध्यक्ष, ब्लॉकों के मुखिया और कोटेदारों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। उन्हें तरह-तरह का प्रलोभन दिया जा रहा है। वहीं, प्रत्याशियों का परिवार भी अंतिम वक्त सियासी मैदान में कूद पड़ा है। भाजपा, गठबंधन, कांग्रेस, प्रसपा, जनसत्ता सहित सभी दलों के उम्मीदवारों की पत्नियां रिश्तेदारी की महिलाओं के साथ गांवों में पहुंच रही हैं। वह मां-बहन बनाकर बहू-बेटियों तथा बुजुर्ग महिलाओं से वोट मांगती है। प्रत्याशियों के बेटे, बहू, भतीजे, बेटियां व अन्य परिजन भी वोट की खातिर तपती धूप में पसीना बहा रहे हैं।
बिरादरी, नौकरी और विकास का वास्ता
मंझनपुर। उम्मीदवारों की बीवियां किसी मंझे हुए खिलाड़ी की तरह चुनाव प्रचार कर रही हैं। वह बिरादरी की महिलाओं के बीच बिरादरी का वास्ता देती हैं। दूसरी जगहों पर महिलाओं को बेरोजगार बेटों को नौकरी दिलाने का प्रलोभन देती हैं। विकास के नाम पर किसी को हैंडपंप तो किसी की सड़क बनाने का वादा किया जा रहा है।
बेटों ने छोड़ी पढ़ाई, बेटियों ने ससुराल
मंझनपुर। दूसरे शहरों में रहकर पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों के बेटे, बेटियां सबकुछ छोड़कर पिता का प्रचार करने में जुटे हुए हैं। वहीं, विवाहित बेटियां भी ससुराल से मायके पहुंचकर गलियों की खाक छान रही हैं। प्रत्याशियों ने करीबी रिश्तेदारों को भी बुला लिया है। इन्हें बिरादरी पर डोरे डालने का जिम्मा सौंपा गया है।