मंझनपुर। डीजल के साथ ही खाद-बीज और कीटनाशक के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके चलते खेती की लागत में तकरीबन 25 फीसदी का इजाफा हो गया है। इस बार आलू की फसल तैयार करने में पिछले साल के मुकाबले करीब 5000 रुपये प्रति बीघे अधिक लागत आने की संभावना है। इसे लेकर दोआबा के किसान परेशान।
बड़ी संख्या में जिले के किसान आलू की खेती करते हैं। किसानों की चिंता इस बात को लेकर है कि उनकी आमदनी दो गुनी करने का दावा करने वाली सरकार में ही खेती से जुड़े वस्तुओं मसलन, डीजल, खाद और बीज आदि के दाम तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। सहकारी समितियों पर 13 जुलाई तक डीएपी का प्रति बोरी मूल्य 1076 और एनपीके का 1030 रुपये था। 27 सितंबर को भाव बढ़े और डीएपी के दाम 1250 तथा एनपीके के 1076 रुपये बोरी की हो गई। अब नए स्टॉक में फिर भाव बढ़ गया है। बाजार में वर्तमान रेट डीएपी का 1340 और एनपीके 1100 रुपये बोरी हो गया है। इसके अलावा पोटाश, जाइम और कीटनाशक आदि भी पहले से सवा गुना तक महंगे हो गए हैं।
डीजल का दाम भी दो महीने के भीतर पांच रुपये लीटर तक बढ़कर 75 रुपये हो गया है। इससे सिंचाई जोताई और सिंचाई आदि भी महंगी हो गई है। महंगाई को देखते हुए मजदूरों ने भी मेहनताना बढ़ा दिया है। मंझनपुर के खाद विक्रेता श्रीराम केसरवानी का कहना है कि उर्वरक के दाम अभी और बढ़ने के आसार हैं। शिवपुर गढ़ी के अवकाश प्राप्त शिक्षक एवं किसान रामचंद्र अग्रहरि ने बताया कि डीजल, खाद-बीज और कीटनाशकों के भाव बढ़ने का सीधा असर आलू किसानों पर पड़ेगा। इस बार आलू का बीज भी महंगा है। पिछले साल एक बीघे आलू की फसल तैयार करने में करीब 15 हजार रुपये खर्च आया था, लेकिन इस बार 20 हजार रुपये तक पहुंचने की संभावना है।