ओडीएफ की तरह चलेे कुपोषण भगाओ अभियान
वीडियो कांफ्रेंसिंग कर शासन ने अफसरों को दिए निर्देश
सात मई को अमर उजाला में प्रकाशित खबर को हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया तो शासन जागा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
कुपोषण से हुई तमन्ना की मौत के बाद शासन नींद से जाग गया है। जिले की भयावह स्थिति से अधिकारी रूबरू हुए तो कुपोषण भगाने के लिए ओडीएफ की तरह अभियान चलाने का फरमान जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं शासन स्तर के अधिकारियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की जमकर खिंचाई भी की। हिदायत दी है कि इसमें अब किसी भी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। यह कार्रवाई अमर उजाला में सात मई को प्रकाशित खबर को हाईकोर्ट के संज्ञान में लेने के बाद शासन स्तर से शुरू हुई है।
जिले के 28 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनमें आंशिक कुपोषित बच्चों की संख्या दोगुनी है। छह मई को असाढ़ा गांव की तमन्ना (11 माह) पुत्री गुलाम वारिस की कुपोषण से मौत हो गई थी। इस खबर को अमर उजाला ने सात मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाजसेवियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 28 जुलाई को हाईकोर्ट ने मामले में डीएम से रिपोर्ट तलब करते हुए डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। अदालत के कड़ा रुख अख्तियार करते ही जिले में हड़कंप मच गया। शासन ने भी इसे गंभीरता से लिया। तीन अगस्त को मुख्य सचिव ने जिले के अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी। इसमें कुपोषण से हुई मौत का ही मामला छाया था। शासन ने गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) की तरह कुपोषण भगाओ अभियान चलाएं। इस अभियान के तहत पंचायती राज, स्वास्थ्य विभाग, ग्राम्य विकास और बेसिक शिक्षा विभाग समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करेंगे। इसके अलावा जहां आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं वहां आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएंगे। फरमान जारी होते ही सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने डीपीओ राकेश मिश्र को सभी बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश जारी कर दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अब इस मामले में लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।
‘तमन्ना’ जगा गई हजारों बच्चों में नई जिंदगी की उम्मीद
कुपोषण से जंग को मिसाल बनी मासूम तमन्ना की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
तमन्ना को जिंदगी तो नसीब नहीं हुई लेकिन उसने मर कर हजारों कुपोषित बच्चों में नई जिंदगी की उम्मीद जरूर जगा दी है। हाईकोर्ट के कड़ा रुख अपनाते ही शासन ने जिले के कुपोषित बच्चों की मानीटरिंग शुरू कर दी है। इससे कुपोषित 28 हजार बच्चों की निगरानी शुरू हो गई है। अब एक नहीं बल्कि पांच-पांच विभाग इनके स्वास्थ्य की देखभाल करेंगे।
जिले में लगभग 28 हजार बच्चे कुपोषित हैं। इनमें सरसवां और कौशाम्बी ब्लाकों के बच्चे सबसे ज्यादा हैं। मंझनपुर ब्लाक क्षेत्र के असाढ़ा गांव की स्थिति सबसे बदतर है। डेढ़ साल के भीतर यहां 14 बच्चे कुपोषण का शिकार हो गए। इनमें तमन्ना भी शामिल थी। असाढ़ा के गुलाम वारिस अपनी 11 माह की बेटी तमन्ना को पांच मई को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर आए थे। कुपोषण की वजह से उसकी स्थिति नाजुक थी। सात किलो वजन होना चाहिए था लेकिन सिर्फ चार किलो ही था। वह सूख कर कंकाल हो चुकी थी। मुफलिसी के दौर में जी रहा गुलाम वारिस अंधविश्वास के चक्कर में तमन्ना को दूसरे ही दिन घर लेकर चला आया। इससे उसकी मौत हो गई। तमन्ना की मौत क्रांति बन गई। इलाहाबाद के समाजसेवियों ने उसकी मौत को लेकर पड़ताल की। इसके बाद याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन से जवाब तलब किया। जिसका परिणाम रहा कि कुपोषण को लेकर प्रशासन ही नहीं शासन भी सक्रिय हुआ है। एक-एक गांव की रिपोर्ट मांगी गई है। अब ग्राम पंचायत ही नहीं बल्कि राजस्व गांव से भी कुपोषित बच्चों की रिपोर्ट तलब की गई है। अधिकारियों को चेतावनी मिली है कि यदि कुपोषण से अब मौत हुई तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना होगा। यही कारण है कि डीपीओ राकेश मिश्र ने सभी सीडीपीओ, सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सचेत किया है कि इसमें तनिक भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने एएनएम को निर्देश जारी किया है कि शत-प्रतिशत बच्चों व गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होना चाहिए। हर हफ्ते अपने क्षेत्र के गांवों में कैंप लगाकर टीकाकरण करें। पंचायती राज विभाग को फरमान जारी हुआ है कि वह साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दे क्योंकि कुपोषण की यह भी एक अहम वजह है। इन सबके लिए सभी विभागों को हर माह होने वाली जांच में रैंक मिलेगी।
मेगा कॉल सेंटर लेगा हालचाल
शासन ने कुपोषित बच्चों की देखभाल के लिए मेगा कॉल सेंटर शुरू किया। इसका कंट्रोल रूम लखनऊ में हैं। वहां से प्रतिदिन जिले के सभी गांवों के ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी व एएनएम को फोन किया जाएगा और बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाएगी। कुपोषित बच्चों की प्रतिदिन की प्रगति क्या है, इसकी भी जानकारी देनी होगी।
कुपोषण की जांच में किसको मिलेंगे कितने नंबर
0 पंचायती राज विभाग को साफ सफाई पर 40 नंबर
0 टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग को 25 नंबर
0 महिलाओं को रोजगार देने पर मनरेगा को पांच नंबर
0 हॉटकुक्ड में आईसीडीएस विभाग को पांच नंबर
0 पोषाहार वितरण में आईसीडीएस विभाग को पांच नंबर।
0 गांव के अति कुपोषित बच्चों के सुधार पर पांच नंबर।