- जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए नियुक्त हैं सात चिकित्सक
- एनआईसीयू वार्ड में 24 घंटे मौजूद रहते हैं बाल रोग विशेषज्ञ
मंझनपुर। विभिन्न बीमारियों की चपेट में आकर दोआबा में भी पिछले साल दो माह में 21 बच्चों की जान जा चुकी है। हालांकि जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए सात चिकित्सक तैनात हैं, वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चे 24 घंटे चिकित्सक व प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में रहते हैं।
जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाले तो न्यू सिक वार्न यूनिट में अक्तूबर 2019 में 127 नवजात को भर्ती किया गया। 15 बच्चों की हालत ज्यादा बिगड़ने पर प्रयागराज के लिए रेफर किया गया। इलाज के दौरान 11 बच्चों की मौत हुई थी। नवंबर में 111 बच्चे भर्ती किए गए। आठ बच्चे रेफर हुए जबकि 10 की मौत हुई। इसी तरह दिसंबर माह में 108 बच्चों भर्ती किया गया। जिसमें नौ बच्चे रेफर हुए और 11 की इलाज के दौरान मौत हुई थी।
अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए डॉ. विश्व प्रकाश, डॉ. आरके निर्मल, डॉ. एससी श्रीवास्तव, डॉ. केके मिश्रा ओपीडी करते हैं। गर्मी के दिनों में एक-एक चिकित्सक के पास करीब 60 से 100 की ओपीडी हुआ करती है। इन दिनो मरीजों की संख्या कम है। इसके अलावा न्यू सिक वार्न यूनिट में डॉ. निखिल धवन, डॉ. डीके मौर्या और डॉ. आरएन त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है। यह चिकित्सक शिफ्टवार अस्पताल में मौजूद रहकर नवजात शिशु की देखभाल करते हैं।
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11 बेड का है एनआईसीयू
मंझनपुर। जिला अस्पताल में नवजात बच्चों को भर्ती करने के लिए 11 बेड (मशीन) है। हर बेड पर वार्मर (बच्चों को गर्म रखने की मशीन) लगी है। पीलिया से बच्चे को बचाने लिए पांच फोटो थेरिपी की यूनिट लगाई गई है। इसके अलावा बड़े बच्चों के लिए पीडिया वार्ड व कुपोषित बच्चों के लिए पोषण पुर्नवाश केंद्र बनाया गया है।
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जिले भर से रेफर होकर आते हैं बच्चे
मंझनपुर। जिले के सरकारी और गैर सरकारी ज्यादातर अस्पतालों में बच्चों के चिकित्सक नहीं है। सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने का जोर है। ऐसे में प्रसव के बाद अक्सर नवजात को समस्या हो जाती है। नतीजतन सारे बच्चे इलाज के लिए या तो जिला अस्पताल या फिर प्रयागराज रेफर किए जाते हैं।
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इनका कहना है
जिला अस्पताल में तो बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या पर्याप्त है। पर, मदर एंड चाइल्ड विंग में बच्चों के डॉक्टर की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में भी पैदा हुए गंभीर बच्चों को इलाज के लिए यहां लाया जाता है। अस्पताल में बच्चों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था है।
डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस जिला अस्पताल