छात्राओं से स्कूल में होता था भेदभाव
-दवा मांगने पर छात्राओं का नाम काटने की दी जाती थी धमकी
-छात्राओं से भेदभाव करने का आरोप साबित, वार्डेन की बढ़ी मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिलाधिकारी कार्यालय के बगल में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राएं तानाशाह वार्डेन की मनमानी का शिकार थीं। यहां छात्राओं से जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता था। दवा मांगने पर नाम काटने की धमकी तक दी जाती थी। छात्राओं ने हिम्मत जुटाकर विरोध किया तो सारे रहस्यों से पर्दा उठ गया। डीआईओएस व अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की जांच में शिकायत सही पाई गई है। अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए डीएम को भेज दी है।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मंझनपुर की वार्डेन मुदिता शुक्ला शासन की व्यवस्था से अलग अपनी व्यवस्था का संचालन कर रही थीं। यहां लगभग 95 छात्राएं पंजीकृत हैं। लगभग 20 छात्राएं नियमित आवास में रहकर पढ़ाई करती हैं। पखवारा भर पहले छात्राओं ने सुबह बीएसए महराज स्वामी का आवास घेर लिया था। बीएसए से बताया कि उनसे नाली साफ कराने के अलावा घास कटवायी जाती है। तीन दिन बाद शिक्षिका जया भारती व चतुर्थ श्रेणी कर्मी अजय कुमार इस्तीफा देकर चले गए थे। मामला गंभीर हुआ तो डीएम ने डीआईओएस सुरेंद्र कुमार और अतिरिक्त मजिस्ट्रेट लालजी मिश्र से सात सितंबर को जांच करवाई। अधिकारियों को कमरा संख्या एक व दो की छात्राओं ने घास कटवाने, दवा मांगने पर नाम काटने की धमकी देने की जानकारी दी। साथ ही खाना बनवाने का भी आरोप लगाया। वार्डेन से भी सवाल-जवाब हुए, लेकिन वह संतोष जनक उत्तर नहीं दे पाई। बताया कि किचन गार्डेन विकसित करने के लिए परियोजना कार्यालय से निर्देश मिला था। इस संबंध में वह कोई अभिलेख नहीं दिखा सकीं। जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट कार्रवाई के लिए डीएम को भेज दी है।
विद्यालय में वार्डेन द्वारा छात्राओं से जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता है। छात्राओं से खाना भी बनवाया जाता है। इसके अलावा घास कटवाई जाती है।
शादमा सिद्दीकी- टीचर
विद्यालय में वार्डेन जाति के आधार पर भेदभाव तो करती ही हैं, छात्राओं को परेशान भी करती है। आवास पहुंचते ही छात्राओं को खाना बनाने व घास काटने की हिदायत दी जाती है।
दीपिका राज-टीचर
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‘कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। कई खामियां मिली हैं। डीएसफोर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाथूराम बौद्ध की कई शिकायतें सही मिली हैं।’
लालजी मिश्र, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट, सुरेंद्र सिंह, डीआईओएस