मंझनपुर। किसानों की असली जमापूंजी उसकी भूमि होती है। यही खेती उसकी जिंदगी भी होती है। कर्ज लेकर किसानों ने जमीन के साथ अपनी जिंदगी भी बैंकर्स के नाम बंधक कर दी है। ऐसे हजारों किसान हैं जिनकी भूमि बैंकों के नाम बंधक है। तय समय पर कर्ज की रकम अदा न करने वाले किसानों की ब्याज बढ़ती जा रही है। ऐसे में खतरा बढ़ गया है कि किसानों के हाथ से उनकी भूमि जा सकती है।
यही कारण है कि किसान कर्ज के चक्कर में फंसकर छटपटा रहा है। किसानों की यह बेचैनी उनकी जान ले सकती है। इससे अफसर वाकिफ हो चुके हैं। यही कारण है कि वह भी अब कर्ज माफी की गाइड लाइन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि समय रहते किसानों को वह राहत दे सकें।
जिले के सवा लाख किसानों ने बैंकों से केसीसी ले रखी है। इनमें से 28 हजार किसानों को पिछले साल किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का नवीनीकरण किया गया है। इस साल दो हजार 762 किसानों ने केसीसी का लाभ लेने के लिए नया आवेदन किया है। बैंकर्स केसीसी का लाभ देने के लिए किसान की जमीन को बंधक कराते हैं। इसके बाद चार प्रतिशत ब्याज की दर से लोन देते हैं।
एक फसल की मियाद पूरी होने पर किसान को ऋण की अदायगी करनी पड़ती है। यदि समय से कर्ज की रकम अदा नहीं होती तो बैंकर्स 12 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूलना शुरू कर देते हैं। यहीं से किसान के दुर्दिन शुरू हो जाते हैं। 50 हजार से ज्यादा किसान कर्ज माफी के दायरे में हैं। रामबाबू की मौत ने इन किसानों को झकझोर दिया है।
इनको चिंता सताने लगी है कि यदि किन्हीं कारणों से उनका कर्ज माफ न हुआ तो वह क्या करें। जमीन तो हाथ से चली गई तो वह क्या करेंगे। जिस परिवार को उबारने के लिए उन्होंने कर्ज लिया था, वही संपत्ति से वह बेदखल हो जाएंगे। इसकी चिंता उनकी जान पर आफत बन सकती है। कर्ज लेने वाले किसानों के परिजन भी इससे परेशान हैं।
खेती के साथ ‘बंधक’ है हजारों किसानों की ‘जिंदगी’
कर्ज माफ न होने पर हाथ से जाएगी किसानों की जमीन
कर्ज देने के बदले बैंक किसानों की भूमि कराता है बंधक