मंझनपुर। कौशाम्बी जिले में कराए जा रहे विद्युतीकरण व फीडर सेप्रेशन के कार्यों में बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। कार्यदायी संस्थाओं ने मानक को दरकिनार कर सरकारी खजाने को लाखों का गोलमाल कर रही हैं। इसका खुलासा ग्रामीण विद्युतीकरण कारपोरेशन महाप्रबंधक फुजैल अहमद के निरीक्षण में हुआ है। माना जा रहा है कि हकीकत से पर्दा उठने के बाद कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई होना तय है।
सौभाग्य योजना के तहत कार्यदायी संस्था विश्वनाथ द्वारा जिले के 1310 मजरों का विद्युतीकरण किया जा रहा है। संस्था का दावा है कि अब तक करीब 1250 मजरों में काम पूरा कर लिया गया है। इसी तरह बीटीएल द्वारा नलकूपों के फीडर के सेप्रेशन का कार्य चल रहा है। इन सभी कार्यों के निरीक्षण के लिए बुधवार को भारत सरकार की ओर से ग्रामीण विद्युतीकरण कारपोरेशन के महाप्रबंधक फुजैल अहमद, असिस्टेंट मैनेजर अनिल परेला ने अपनी टीम के साथ कौशाम्बी जिले का दौरा किया। यहां चायल डिवीजन के बलकरनपुर और इब्राहिमपुर गांव पहुंचकर कार्यदायी संस्थाओं के कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही सौभाग्य योजना के तहत ग्रामीणों को मुफ्त में दिए गए कनेक्शनों की जांच की।
टीम को मौके पर चौकाने वाला नजारा दिखा। टीम ने दोनों कार्यदायी संस्थाओं का काम गड़बड़ पाया। देखा गया कि कार्यदायी संस्थाओं ने पोल की ग्राउटिंग ही नहीं की है। एबीसी (एरिया बंच कंडक्टर) होल्ड करने के लिए क्लैंप भी नहीं लगाया गया है। फीडर सेप्रेशन के लिए खंभे लगाने में कार्यदायी संस्था बीटीएल के ठेकेदारों ने मानक की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। बगैर स्टे वायर के ही इधर-उधर खंभे गाड़ दिए गए हैं। इसके अलावा टीम ने ग्रामीणों से पूछा कि उनसे सौभाग्य योजना से दिए गए विद्युत कनेक् शन, मीटर और वायर के नाम पर किसी ने कोई वसूली तो नहीं की। अंत में अनियमितताओं का पुलिंदा लेकर टीम इलाहाबाद रवाना हो गई। टीम के साथ चायल डिवीजन के एक्सईएन राजेश कुमार मौर्या भी मौजूद रहे।