चायल। डाक कर्मियों की मनमानी के कारण इंदौर से कौशाम्बी के बूंदा गांव के लिए भेजा गया मनीआर्डर 17 साल बाद भी नहीं पहुंचा है। मनीआर्डर भेजने के दो महीने बाद से भुक्तभोगी और उसका परिवार प्रधान डाकघर इलाहाबाद का चक्कर काट रहा है। इंदौर से भेजा गया मनीआर्डर कहां गुम हो गया, इस बावत डाक विभाग अफसर भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। बुधवार को भी भुक्तभोगी ने इसकी लिखित शिकायत पीएमजी से की है।
पिपरी कोतवाली क्षेत्र के बूंदा गांव का रहने वाला मोहम्मद राशिद पुत्र मतीउल्ला ने बताया कि वह पहले इंदौर में रहकर नौकरी करता था। उसका कहना है कि 5 नवंबर 1997 को उसने महू डाकघर इंदौर से पत्नी आरफा बीबी के नाम दो हजार रुपये का मनीआर्डर किया था। पर, अब तक वह मनीआर्डर उसकी बीवी को नहीं मिल सका है। मोहम्मद राशिद ने बताया कि पैसे भेजने के करीब दो महीने बाद ही वह गांव आया था।
यह आने पर उसे मनीआर्डर घर नहीं पहुंचने की जानकारी हुई। बताया कि इसके बाद से ही वह इंदौर से लेकर इलाहाबाद के प्रधान डाकघर का चक्कर लगा रहा है। भुक्तभोगी के मुताबिक प्रधान डाकघर इंदौर के अफसरों ने पूछताछ के दौरान उसे बताया कि मनीआर्डर भेजा जा चुका है। वहीं इलाहाबाद डाकघर के अधिकारी कर्मचारी उसके मनीआर्डर की बावत उसे कोई भी जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। आरोप है कि इन 17 सालों में वह कम से कम से 20 प्रार्थनापत्र इंदौर और इलाहाबाद के प्रधान डाकघर को दे चुका है। पर, उसकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। पीड़ित का कहना है कि अब वह इस मामले की शिकायत उपभोक्ता फोरम में करेगा।