मंझनपुर। लंबे इंतजार के बाद नहर में पानी पहुंचा तो सिंचाई की जगह फसलों को जलमग्न करने लगा। दूसरी ओर कई माइनरें ऐसी हैं जहां सिंचाई के लिए आज भी किसानों को पानी आने का इंतजार है।
रबी की बुवाई के लिए इस साल किशनपुर पंप कैनाल की प्रमुख नहर पूरी तरह से बंद रखी गई। सिल्ट सफाई का काम पूरा होने के बाद माइनर को 17 दिसंबर को चालू किया गया। नहर चालू होने के बाद किसान फसलों की सिंचाई के लिए पानी आने का इंतजार करने लगे। सोमवार रात बेरौचा माइनर में बेलदार ने इतना अधिक पानी छोड़ दिया कि पटरी ही फट गई। इससे बारम्बारी, गौरए, हिसामपुर, जोगापुर आदि गांवों के किसानों की सैकड़ो बीघा फसल जलमगभन हो गई।
वहीं, दूसरी ओर घोसिया, म्योहर, बंधुरी रसूलीपुर, कनैली माइनरों में सिंचाई के लिए बूंद भर पानी नहीं पहुंच रहा है। एक तरफ जहां पानी की अधिकता से फसलें बर्बाद हो रहीं हैं वहीं दूसरी ओर पानी के आभाव में किसानों की गाढ़ी कमाई सूख रही है। नहर की दोहरी मार झेल रहे किसान आखिर कैसे उबर पाएंगे ? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
असरदारों का चलता है सिक्का
माइनरों में पानी के पीछे इलाकाई असरदारों का कारनामा चर्चा में हैं। लोगों की माने तो अपने क्षेत्र के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए असरदार अन्य माइनरों को बंद कराकर अधिकारियों पर दबाव बनाते हुए पानी छोड़वाते हैं। इसके चलते अन्य माइनरों में पानी तभी छोड़ा जाता है जब असरदारों के इलाके में सिंचाई पूरी हो जाती है। बेरौंचा माइनर में क्षमता से अधिक पानी छोड़े जाने के मामले को लोग इसी से जोड़कर देख रहे हैं। बहरहाल अन्य माइनरों में पानी नहीं पहुंचने से किसान हैरान-परेशान हैं।
माइनरों में पानी रोस्टर के मुताबिक छोड़ा जाता है। जिस माइनर का नंबर है उसमें पानी छोड़ा गया है। इसके बाद जिन माइनरों में पानी नहीं पहुंचा उनका नंबर है।
आरके निरंजन, एक्सईएन सिंचाई