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जिला अस्पताल के मरीजों की जान से खेल रहे तेज रफ्तार वाहन

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जिला अस्पताल के मरीजों की जान से खेल रहे तेज रफ्तार वाहन
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करारी रोड पर स्थित अस्पताल गेट के समीप नहीं बनाया गया ब्रेकर
गेट के आस-पास अस्पताल का संकेतक भी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। गांव, गली और मोहल्ले में स्पीड ब्रेकर बनाने वाला लोक निर्माण विभाग जिला अस्पताल आने वाले मरीज व तीमारदारों की सुरक्षा को भूल बैठा है। लगातार हो रहे हादसे के बाद भी अस्पताल के दोनों गेट के पास ब्रेकर नहीं बनाया गया। अस्पताल प्रशासन की तरफ से भी इस तरफ पहल नहीं की गई। यातायात और पुलिस भी लाश उठाकर पोस्टमार्टम भेजने के सिवा इस तरफ पहल नहीं कर रही है।
कौशाम्बी जिले में 18 लाख से ज्यादा की आबादी है। यहां जिला अस्पताल ही ऐसा है जहां सारी आधुनिक सुविधाएं हैं। कौशाम्बी के अलावा पड़ोसी जनपद चित्रकूट व फतेहपुर के सीमावर्ती इलाके के लोग यहां इलाज कराने के लिए आते हैं। जिला अस्पताल मंझनपुर मुख्यालय से करारी जाने वाले मार्ग पर बना है। लोक निर्माण विभाग की चौड़ी रोड को टू लेन में बनाया गया है। इस अस्पताल में प्रवेश करने के लिए दो गेट हैं। दोनों गेट के बीच की दूरी करीब 50 मीटर हैं। मंझनपुर चौराहे से निकलने के बाद और ओसा से घुसने के बाद रास्ते में कहीं कोई ब्रेकर नहीं है। जिसके कारण अस्पताल गेट के समीप लोग आए दिन हादसे का शिकार हो रहे हैं। अस्पताल में रोजाना करीब सात सौ से एक हजार लोग इलाज कराने आते हैं। स्पीड ब्रेकर नहीं होने के कारण वह अपनी बीमारी का इलाज कराना तो दूर मौत का शिकार जरूर बन रहे हैं। ताजा तरीन घटनाओं का जिक्र करें तो एक मई को जिला अस्पताल में ही संविदा पर काम करने वाला शव वाहन के चालक तीरथ लोधी को अस्पताल गेट पर ही तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दिया था। कार से घर जा रहे तीरथ को काफी चोट आई थी। जिला अस्पताल से उसे प्रयागराज के लिए रेफर किया गया लेकिन उसने दूसरे ही दिन दम तोड़ दिया। 10 जून को गिरधरपुर गांव की सुनीता देवी पत्नी लवकुश का बेटा राजू (10) अपनी नानी के साथ एंटी रैबीज (कुत्ता काटने का) इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल आया था। उसे भी तेज रफ्तार चार पहिया वाहन ने टक्कर मार दिया। हादसे में इलाज के दौरान राजू की भी मौत हो गई। इसी तरह दो महीने के दौरान आधा दर्जन लोग हादसे का शिकार होकर जख्मी हो चुके हैं। इसके बाद भी स्पीड ब्रेकर की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
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निजी अस्पतालों में भी होती है भीड़
मंझनपुर। जिला अस्पताल के बाहर व बगल में करीब आधा दर्जन से ज्यादा निजी अस्पताल व अट्रासाउंड और एक्स-रे, पैथोलॉजी खुली हैं। इन सेंटरों में भी काफी मरीजों का आना होता है। इसके अलावा 15 मेडिकल स्टोर संचालित हैं। ऐसे में यहां आने वाले लोगों की सुरक्षा लोक निर्माण विभाग ने भगवान भरोसे छोड़ रखी है।
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बालू वाले वाहनों से होती है दिक्कत
मंझनपुर। जिला अस्पताल के सामने से ही महेवाघाट, दलेलागंज और पश्चिम शरीरा इलाके बालू घाटों के वाहन गुजरते हैं। घाट में नंबर लगाने की जल्दी में यह वाहन काफी रफ्तार से निकलते हैं। इसके कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। पुलिस ने ओसा से जिला अस्पताल होते हुए मुख्यालय आने वाले भारी वाहनों के लिए नो-इंट्री की व्यवस्था कर रखी है। ओसा चौराहे पर बनाए गए नो-इंट्री प्वाइंट की जिम्मेदारी यातायात पुलिस ने होमगार्ड के जवानों को दे रखी है। ऐसे में यह जवान महज 50 रुपया लेकर भारी वाहनों को प्रवेश करने की छूट दे देते हैं। इसके कारण भी अस्पताल के बाहर हादसे हो रहे हैं। आमतौर पर अस्पताल के बाहर सड़क पर संकेतक लगाया जाता था। जिस पर गाड़ी की स्पीड लिमिट व अस्पताल होने की बात दर्शाई जाती है। लेकिन जिला अस्पताल के बाहर ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया।
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इनका कहना है
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। यह बात सहीं है कि अस्पताल के दोनों गेट के पास स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया गया है। इसके लिए सड़क बनाने वाली संस्था व यातायात विभाग को पत्र लिखा जाएगा।
डॉ. दीपक सेठ. सीएमएस, जिला अस्पताल
फोटो नं-2,3,4
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