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भीषण गर्मी का ताप नहीं झेल पा रहे ट्रांसफार्मर

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भीषण गर्मी का ताप नहीं झेल पा रहे ट्रांसफार्मर
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ट्रांसफार्मर की ओवरलोडिंग से बढ़ गई लो वोल्टेज व फाल्ट की समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर/बारा। भीषण गर्मी के मौसम में बिजली के ट्रांसफार्मर भी दगा दे रहे हैं। बिजली की खपत बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर ओवर लोड हो चुके हैं। इसके कारण गांवों में फाल्ट के कारण लो वोल्टेज की समस्या उत्पन्न हो गई है।
गर्मी के कारण एसी, कूलर, पंखा आदि पर बिजली का लोड बढ़ गया है। चटख धूप होने की वजह से ट्रांसफार्मर फुंकने की भी समस्या खड़ी हो गई है। गोपसहसा पावर हाउस से जुड़े 44 गांवों में बिजली की आपूर्ति की जाती है। इन गांवों में लो वोल्टेज की समस्या पिछले दस दिनों से बनी है। उपकेंद्र से जुड़े गांवों में बिजली की समस्या के चलते लोग पानी के लिए भी परेशान हो रहे हैं। वोल्टेज कम होने के कारण फ्रिज, कूलर और एसी शोपीस बनकर रह गए हैं। जिन लोगों ने अपने घरों में सबमर्सिबल की मोटर लगा रखी है वह भी नहीं चल रही है। स्थानीय लोगों की मानें तो आए दिन फाल्ट होने की समस्या रहती है। बिजली जाने के बाद जब भी संविदा कर्मी फाल्ट सही करने आते हैं तो बिना सुविधा शुल्क के वह फ्यूज तक नहीं जोड़ते।
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पावर हाउस में भी रहता है अंधेरा
बारा। गोपसहसा उपकेंद्र के अंर्तगत स्थानीय गांव में 120 उपभोक्ता हैं। इसके बाद भी यहां पर 25 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया है। चुनाव के पहले यहां फुंके ट्रांसफार्मर को सदर विधायक लालबहादुर के कहने पर बदला गया। जो ट्रांसफार्मर आया, उसकी खूंटी खराब थी। इसके कारण यह ट्रांसफार्मर भी लोगों की उम्मीद पर खरा नहीं उतरा। गांव के प्रधान गौरी शंकर का कहना है कि मामले की शिकायत जेई और एसडीओ से की गई। इसके बाद भी ट्रांसफार्मर को बदला नहीं जा रहा। हालात यह है कि गांव के लोगों को अपना मोबाइल चार्ज करने के लिए विजिया चौराहे जाना पड़ता है।
इनका कहना है
कुछ गांवों में 63 व 25 केवीए के ट्रांसफार्मर में लोड ज्यादा होने की शिकायत है। गर्मी के कारण यह समस्या आम होती है। जो भी समस्या है उसका समाधान कराया जा रहा है।
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अंकित कुमार, एक्सईएन
ऑनलाइन ट्रांसफार्मर फुंकने की शिकायत मिलने के बाद उसका सम्बंधित पावर हाउस के जेई से वेरीफिकेशन कराया जाता है। जहां से ओटीपी कोड मिलता है वहां ट्रांसफार्मर भेजे जा रहे हैं। वर्कशॉप में इस व्यवस्था के चलते ट्रांसफार्मरों की पेंडेंसी नहीं है।
रिंकू सेठ, एसडीओ वर्कशॉप
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