जिला जेल के निर्माण में करोड़ों का घोटाला
-14 साल में 14 करोड़ बढ़ गई कारागार की लागत
-तीन पुनरीक्षित बजट के बाद भी नहीं पूरा हुआ काम
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी की जिला जेल के निर्माण में करोड़ों का घोटाला हुआ है। कार्यदायी संस्था ने खेल करते हुए 14 साल में 14 करोड़ का बजट बढ़ा दिया। स्वीकृत बजट 12 की जगह 22 करोड़ रुपए आहरित करने के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका है। कार्यदायी संस्था ने चौथी बार 26 करोड़ के संशोधित बजट की डिमांड कर दी है। मगर जेल प्रशासन ने आगे फूटी कौड़ी देने से इंकार कर दिया है।
वर्ष 2003 में तत्कालीन बसपा सरकार ने कौशाम्बी में 12 करोड़ 45 लाख की लागत से जिला कारागार के निर्माण की स्वीकृति दी थी। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को जेल तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी बीच साल भर बाद सपा सरकार ने कौशाम्बी जिले का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया। इसके चलते कुछ दिन के लिए निर्माण कार्य ठप हो गया। वर्ष 2006 में दोबारा निर्माण शुरू करने के लिए कार्यदायी संस्था ने 16 करोड़ 18 लाख के पुनरीक्षित बजट की डिमांड की। शासन की ओर से धनराशि आवंटित होने के बाद कार्यदायी संस्था ने रकम निकाल ली पर निर्माण नहीं किया गया। चार साल बाद एक बार फिर से कार्यदायी संस्था ने एस्टीमेट बढ़ाकर 22 करोड़ 12 लाख रुपए कर पुनरीक्षित बजट की मांग की। इस मर्तबा भी धनराशि रिलीज कर दी गई। निर्धारित समय गुजरने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। इधर भारतीय किसान यूनियन की तरफ से जल्द जेल चालू करने के लिए आंदोलन शुरू हो गया। बढ़ते दबाव को देखते हुए जेल प्रशासन ने वर्ष 2013 में इस शर्त पर भवन हैंडओवर ले लिया कि बाकी बचे काम जल्द से जल्द पूरा करा दिए जाएंगे। पर, काम कराना तो दूर संस्था के ठेकेदार भाग खड़े हुए। इधर बीच आधे-अधूरे जेल में दिक्कतें बढ़ीं तो कारागार प्रशासन ने काम पूरा कराने का दबाव बनाया तो संस्था ने एक बार फिर 26 करोड़ 69 लाख के पुनरीक्षित बजट की पेशकश कर दी। डीआईजी जेल मुख्यालय आरपी सिंह ने आगे फूटी कौड़ी देने से इंकार कर दिया है।
एस्टीमेट में शामिल कारागार के आधे-अधूरे कार्य-
0 जेल परिसर में तीन किलोमीटर लंबी डामर की सड़क का निर्माण।
0 टाइप-3 व 4 के आवासों में वॉटर सप्लाई के लिए नहीं हुआ कनेक्शन।
0 जेल परिसर व आवासों में नहीं बनाई गई सीवर लाइन।
0 13 हैंडपंपों की बोरिंग का काम बाकी है।
0 जेल परिसर में फायर फाइटिंग की नहीं की गई कोई व्यवस्था।
0 इसके अलावा करोड़ों की लागत से तमाम अन्य काम भी होने बाकी हैं।
डीएम ने कार्यदायी संस्था से किया जवाब-तलब
जिला कारागार में कार्यदायी संस्था के गोलमाल को डीएम मनीष कुमार वर्मा ने गम्भीरता से लिया है। निरीक्षण के दौरान जेल के आधे-अधूरे कार्यों से नाराज डीएम ने कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के प्रबंधक को पत्र लिखकर जवाब-तलब किया है। चेताया कि जल्द ही काम पूरा नहीं करने पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहते हैं अफसर
कारागार निर्माण में खेल के हकीकत की पड़ताल के लिए कार्यदायी संस्था से जवाब-तलब किया गया है। जल्द ही तकनीकी इंजीनियरों की टीम से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मनीष कुमार वर्मा
डीएम