मंझनपुर। चार अप्रैल 1997 को इलाहाबाद की तीन तहसील मंझनपुर, सिराथू, चायल को मिलाकर नया जिला कौशाम्बी बनाया गया था। इसमें 885 पुरवे और सात नगर पंचायतें हैं। जहां 17 लाख की आबादी निवास करती है। अलग जिला बनाने का उद्देश्य इस बदहाल पड़े इलाके को रास्ता, बिजली, पानी, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना था। पर, 18 साल बीतने के बाद भी यहां के करीब 100 पुरवों में बिजली की रोशनी नहीं पहुंच सकी। खंभा, तार नहीं लगने से ये गांव अब भी विकास से दूर बने हुए हैं। फिर भी शायद इसकी फिक्र यहां के जनप्रतिनिधियों, अफसरों को नहीं है।
कौशाम्बी जिला मुख्यालय मंझनपुर से महज मीलभर दूर स्थित है गौरा ग्रामसभा। इस ग्राम पंचायत के तरीपर गांव में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है। करीब 150 घरों की इस बस्ती अब भी शाम होते ही लोग ढिबरी, लालटेन जलाने को मजबूर हैं।
ऐसी ही मजबूरी जिले के लक्ष्मनापुर, कादिर महाजन का पुरा, अहिरन की डांडी, ब्रह्मबारी, चक सतारगंज, मुड़ियाडोली, बेल्हाई, बारीबाग, चुन्नी का पुरा, तिवारी का पुरा, चकिया, गढ़वा का पुरा, राम अधीन का पुरा, बरैसा, जिल्लापर, बरीबाग, भिखियापुर, झनझनगढ़, धनिया का पुरा, राम रतन का पुरा, सरैंया, भैंसहा, जग्गू का पुरा, केवटाना, टिकरी, बख्शी का पुरा, चूहापीरन, उगैया, रसूलपुर, अलावलपुर टिकरी, भटपुरवा, लेहदरी खतीब, पति का पुरा, बिगिनियापुर, मोंगला, मैदहाई, कैथीपर, बाले का पुरा आदि गांवों में भी है। इन गांवों में अब तक विद्युतीकरण नहीं होने से ग्रामीणों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ रही है। लोग बैटरी के माध्यम से टीवी देखने को मजबूर हैं। वहीं लोगों को अपने मोबाइल की बैटरी भी चार्ज करने के लिए बाजार जाना पड़ता है। लोग दुकानों पर पैसे देकर बैटरी चार्ज कराते हैं।
गांव में बिजली आए, इसके लिए लोकसभा चुनाव के दौरान भरवारी के जिल्लापर गांववालों ने मतदान बहिष्कार की धमकी भी दी थी। तब एसडीएम, विभागीय अफसरों ने लोगों को समझाकर शांत कराया था। इतना ही नहीं गांववालों ने कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया। अभी दिसंबर महीने में ही ग्रामीणों ने बिजली के लिए बेमियादी अनशन भी शुरू किया था। दो दिन बाद खुद सिराथू विधायक वाचस्पति मौके पर पहुंचकर 15 दिन के भीतर विद्युतीकरण का भरोसा दिलाकर ग्रामीणों का अनशन तुड़वाया था। आरोप है कि इसके बाद भी अब तक गांव में खंभे-तार नहीं लग सके हैं।
बिजली विभाग के आंकड़ों पर ही गौर करें, जो जिले में कुल तीन लाख 49 हजार 854 मकान हैं। पर, जिला बनने के 18 साल बाद भी सिर्फ 43 हजार 723 मकानों में ही बिजली का कनेक्शन हो सका है। विभाग की तमाम योजनाओं और अभियान के बाद भी जिले के तीन लाख छह हजार 124 मकानों में अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं हो सका है। इन मकानों को बिजली कनेक्शन से संतृप्त करना विद्युत विभाग के साथ ही यहां के अफसरों के लिए एक बड़ी चुनौती है।