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Kaushambi News: आठ महीने में 14,157 लोग हुए कुत्ता, बंदर, बिल्ली के शिकार

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विश्व रेबीज दिवस आए और कुत्ता, बंदर, बिल्ली आदि जीवों के हमलों की चर्चा न की जाए। भला यह कैसे संभव है। कौशाम्बी में भी इनमें हमले कम नहीं हो रहे हैं। इस साल भी जनवरी से लेकर अगस्त तक 14,157 लोग इनके शिकार हो चुके हैं। यह आंकड़े सिर्फ उन लोगों के हैं, जिन्होंने सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज के टीके लगवाए हैं। इसके अलावा तमाम ऐसे लोग भी होंगे, जिन्होंने बाहर अपना इलाज कराया होगा। जिले में सबसे ज्यादा आतंक कुत्तों का आतंक है। मंझनपुर, सिराथू, मूरतगंज, कड़ा, भरवारी समेत सभी जगह लोग इनसे परेशान है। आए दिन कोई न कोई इनके हमले में घायल हो जाता है। इस साल जनवरी से लेकर अगस्त तक ही 11,676 लोग कुत्तों के हमलों में घायल होकर इलाज कराने मेडिकल कॉलेज, सीएचसी व पीएचसी पहुंचे। इसके अलावा बंदरों ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। 1,958 लोग इनसे घायल हुए हैं। बिल्ली के काटने से 393 लोग जख्मी हुए।
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सियार व अन्य जंगली जीवों के हमले में 130 लोग घायल हो चुके हैं। इस तरह इन जीवों ने अब तक जिले में 14,157 लोगों को काटकर अस्पताल पहुंचा दिया है। पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक 18,880 लोग इनके शिकार हुए थे।



5,318 वायल एंटी रेबीज है उपलब्ध
मेडिकल कॉलेज में तो एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी इनकी व्यवस्था कर रखी है। 15 से 20 मरीज अकेले मेडिकल कॉलेज में ही एंटी रेबीज लगवाने आते हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ. सुनील सिंह बताते हैं कि जिले में एंटी रेबीज की कोई कमी नहीं है। इस समय कुल 5,318 एंटी रेबीज के वायल उपलब्ध हैं। इसमें से 3,415 वायल रेबीज अस्पतालों में है। जबकि 1900 वायल ड्रग स्टोर में रखी है।
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कुत्ते, बंदर और बिल्ली आदि के काटने पर ऐसा वायरस शरीर में जाता है जो 10 दिन से लेकर 10 साल तक अपना असर दिखा सकता है। जब कभी जानवर काटे तो तत्काल नजदीकी सीएचसी-पीएचसी में पहुंचे। सभी जगह एंटी रेबीज उपलब्ध है। इलाज में देरी से परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
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डॉ. संजय कुमार

सीएमओ
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