मंझनपुर। दोआबा के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 2493 बच्चे गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। यह खुलासा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कराए गए परीक्षण में हुआ है। डॉक्टरों ने इनके अभिभावकों एवं शिक्षकों को नजदीक के सीएचसी, पीएचसी में नियमित जांच व इलाज कराने की सलाह दी है। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की वजह से ये बच्चे नियमित स्कूल भी नहीं जा रहे हैं। ऐसे में इनके स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा पर भी असर पड़ रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पिछले कई वर्षों से स्कूली बच्चों की नियमित स्वास्थ्य परीक्षण व इलाज कराने की भी व्यवस्था है। इसके लिए हर ब्लॉक में दो टीमें लगाई गई हैं। जो साल में कम से कम एक मर्तबा प्रत्येक परिषदीय स्कूल पहुंचकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती हैं। इन टीमों ने नवंबर तक जिले के तकरीबन 1444 स्कूलों में पंजीकृत 1,10,771 बच्चों के सापेक्ष 1163 विद्यालय के 92,535 विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान टीम ने जो रिपोर्ट तैयार की है वह काफी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से करीब 6208 बच्चे विभिन्न रोगों से ग्रस्त मिले। इन्हें नजदीकी सामुदायिक एव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफर किया गया।
30 नवंबर की रिपोर्ट में सर्दी, जुकाम, बुखार आदि बीमारियों से परेशान 3715 बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि गंभीर रोग से पीड़ित लगभग 2493 बच्चे अब भी बीमार हैं। इन बच्चों में खून की कमी के अलावा आंख, नाक, दांत संबंधी दिक्कत अधिक है। शनिवार को सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान सीडीओ इंद्रसेन सिंह ने चिंता जाहिर की। कहा कि सभी स्कूलों में एमडीएम के जरिए बच्चों को पौष्टिक भोजन दिए जाने के बावजूद बच्चों में इस तरह की बीमारियों का सामने आना गंभीर बात है। जबकि डॉक्टरों का तर्क है कि बीमारी से पीड़ित बच्चे निर्धन परिवार के हैं। लिहाजा उनके सामाजिक परिवेश, खान-पान, रहन-सहन ठीक नहीं रहता है। जिसके चलते वह बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं।