सचिवालय के नाम पर पानी में बह गई करोड़ों की रकम
-छह साल पहले बीआरजीएफ से गांवों में बने थे मिनी सचिवालय
-कहीं बांधे जा रहे मवेशी तो कुछ पर दबंगों का कब्जा
फोटो नं-
अमर उजाला ब्यूरो
नोवादा। मिनी सचिावलयों के नाम पर सरकारी खजाने का करोड़ों रुपया पानी में बह गया है। निर्माण के छह साल बाद भी भवन का मुकम्मल इस्तेमाल नहीं होने से दरवाजे, खिड़की अराजक तत्वों ने उखड़ डाले। कुछ पर दबंगों ने कब्जा कर लिया तो कइयों में मवेशी बांधे जा रहे हैं। बीडीओ नेवादा ने क्षेत्र के सचिवालयों की ताजा रिपोर्ट सचिवों से तलब की है।
वर्ष 2010-11 में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि से ग्राम सभाओं में मिनी सचिवालय का निर्माण कराया था। नेवादा ब्लॉक के उमरवल, बिगहरा उस्मानपुर, जवई, गोविंदपुर, जरैनी, दरियापुर, तरना, चक पिनहा, मोहम्मदाबाद, चिरारी, बरेठी आमदपुर, तिल्हापुर, शेरगढ़, नसीरपुर, रेही, मकदूमपुर, सिकंदरपुर अइमा समेत डेढ़ दर्जन गांवों में बने इन सचिवालयों पर सरकारी खजाने की तकरीबन ढाई करोड़ रुपये से ऊपर की रकम खर्च की गई थी। इस भवन में ही ग्राम सचिव व प्रधान को नियमित बैठक कर विकास का खाका तैयार करने का निर्देश है। ग्राम सभा की खुली बैठक भी यही कराने का प्राविधान है। पर, निर्माण के बाद से आज तक इन सचिवालयों में कभी भी इस तरह का कोई काम नहीं किया गया। देखरेख के अभाव में महज छह साल के भीतर सचिवालय भवन बदहाल हो गए। दरवाजा, खिड़की चोर-उचक्के उखाड़ ले गए। मवेशी बांधे जाने से कई सचिवालय तबेले में तब्दील हो गए जबकि कई पर दबंगों ने कब्जा जमा लिया है। शुक्रवार को देखा गया कि बिगहरा उस्मानपुर गांव के सचिवालय पर विद्युतीकरण कर रहे एक निजी कंपनी के कर्मचारियों ने डेरा डाल रखा था। यहां आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित हो रहा है जबकि जरैनी गांव के सचिवालय का दरवाजा, जंगला गायब हो चुका है। बीडीओ अखिलेश तिवारी का कहना है कि सचिवालयों को व्यवस्थित कराया जाएगा। इसके लिए सभी सचिवों को निर्देश दे दिया गया है।
हादसों को दावत दे रहा सरायअकिल का बदहाल पावर हाउस
-जेई और कर्मचारियों के लिए बने आधा दर्जन आवास भी हुए जर्जर
फोटो-
सरायअकिल (ब्यूरो)। विद्युत उपकेंद्र सरायअकिल का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। आवासीय भवन भी बदहाल हैं। विभागीय लिखापढ़ी के बावजूद जर्जर भवनों का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
वर्ष 1972 में सरायअकिल विद्युत उपकेंद्र का निर्माण कराया गया था। उस समय पावर हाउस में आधा दर्जन भवनों का भी निर्माण हुआ था। इनमें से पांच कमरे कर्मचारियों व एक जेई के लिए बनाया गया था। विद्युत आपूर्ति के लिए बना कंट्रोल रूम भवन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। बारिस के दिनों छत से पानी टपकता है। अब किसी भवन में खिड़की दरवाजा नहीं है। दीवारें गिर चुकी हैं। पावर हाउस में बाउंड्रीवाल भी नहीं है। इसके चलते रात में कर्मचारी भयभीत रहते हैं। इस वक्त उपकेंद्र में जेई के साथ ही तीन लाइनमैन, नौ संविदाकर्मी व एक ऑप्रेटर की नियुक्ति है। जर्जर भवन में रहकर काम करने में सभी हादसे की आशंका से भयभीत रहते हैं। शिकायत के बावजूद विभागीय अफसरों के ध्यान नहीं देने से यहां कभी भी अनहोनी हो सकती है।
--------------
रात में लगता है जुआरियों का जमघट
चहारदीवारी के अभाव में रात को उपकेंद्र परिसर में अराजकतत्वों का जमघट लगा रहता है। यह सभी कर्मचारियों के खाली पड़े जर्जर आवासों में घुसकर जुए की फड़ सजाते हैं। आरोप है कि शिकायत के बावजूद इलाकाई पुलिस कार्रवाई नहीं करती है।
-------------
क्या कहते हैं जेई
उपकेंद्र की हालत दयनीय है। कंट्रोल रूम में पानी रिसने के कारण अक्सर पैनल खराब हो जाते हैं। इससे परेशानी के साथ ही हादसे का खतरा बना रहता है। विभागीय अधिकारियों को भी इसकी जानकारी है।
सौरभ मौर्या, अवर अभियंता
विद्युत उपकेंद्र सरायअकिल